रीवा। मैं महिला हूं और मैं जब से पार्टी में आकर जनप्रतिनिधि के रूप में चुनी गई हूं तब से लगातार मुझे परेशान किया जा रहा है। इस तरह की परेशानी से मैं इतनी ऊब चुंकी हूं कि मुख्यमंत्री जी ने कोई सार्थक पहल नहीं की तो मैं राजनीति ही छोड़ दूंगी और अगली बार चुनाव नहीं लड़ूंगी। यह व्यथा किसी और की नहीं बल्कि सत्ताधारी दल भाजपा की विधायक नीलम अभय मिश्रा की है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को पत्र लिखकर अफसर राज से अवगत कराया है। उनका कहना था कि जब जनप्रतिनिधि की सुनवाई ही नहीं तो फिर काहे की प्रतिनिधि। विधायक ने बताया कि वे अपनी समस्या से कई बार अफसरों एवं जनप्रतिनिधि सहित सीएम को भी अवगत करा चुकी हैं। लेकिन अफसरों की तानाशाही के चलते मामले का निराकरण नहीं हो पा रहा। उन्हें अंततः इस तरह का निर्णय लेना पड़ रहा है।

यह है मामला

विधायक नीलम मिश्रा का खुटेही में नवनिर्मित कॉम्पलेक्स है। जिसके निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए ननि प्रशासन लगातार पत्राचार कर रहा है। विधायक ने बताया कि चूंकि उनका भवन बनकर तैयार है और नियम के तहत भवन का निर्माण उन्होंने करवाया था। कुछ छोटी त्रुटियां अगर रह गई थीं तो उसके लिए नगर निगम के नियमानुसार समझौते के तहत 19 लाख 65 हजार का फाइन भरा था। महापौर आदि ने इस मामले में समझौता भी करवाया था, लेकिन अफसरों की तानाशाही के चलते भवन को गिरााने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब अधिकारी समझौते के बाद भी दबाव बना रहे हैं। अब इसके पीछे किसका दवाब है यह तो मैं नहीं जानती। लेकिन जिस तरह से अधिकारियों का रवैया है वह आहत करने वाला है।

हमने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी समस्या से अवगत कराया है। मैं इतना परेशान हो चुकी हूं कि लगता है कि राजनीति ही छोड़ दूं। मैंने पहले भी अपनी समस्या से संबंधितों को अवगत कराया था। हमारा जो फ्लैट है उसमें महापौर के हस्तक्षेप से समझौता भी हुआ था और हमने फाइन भी भरा है। इसके बाद भी उसे गिराने लगातार पत्राचार और दबाव बनाया जा रहा है।

 

-नीलम मिश्रा, भाजपा विधायिका, सेमरिया।

Source ¦¦ janghatna.com