मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले जिले के मजदूरों के सामने कैशलेस इंडिया किसी मुसीबत से कम नहीं है। जिस टेक्नोलॉजी को भारत सरकार सौगात बता रही है, वही इन मजदूरों के गले की फांस बनने वाली है। दरअसल, मनरेगा व ग्रामीण विकास के कार्यों में मजदूरी करने वाले इन मजदूरों के खाते में सरकार द्वारा भुगतान किया जाता है। कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ मजदूर इस रुपए को निकालने के लिए बैंक जाते थे तो इन्हें यहां विड्रॉल फार्म थमा दिया जाता है। इस फार्म को भरने के लिए मजदूर दूसरों का मुंह ताकते हैं। दूसरों की मदद से ही ये फार्म भरकर जैसे-तैसे रुपए खातों से निकालते आ रहे हैं। लेकिन सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कैशलेस इंडिया को सफल बनाने के लिए अब ग्रामीण एवं पंचायत विभाग के पीएस ने जिला पंचायत को जिले में सभी मजदूरों को एटीएम कार्ड उपलब्ध कराने का आदेश जारी कर दिया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बैंक का विड्रॉल फार्म भरने के लिए जिन मजदूरों को दूसरों की मदद लेना पड़ता है वे एटीएम मशीन का संचालन कैसे करेंगे। उनके साथ साइबर शातिरों के ठगी करने की आशंका भी काफी बढ़ गई है।

मजदूरों के सामने आने वाली इन समस्याओं को दूर करने का दावा जिला पंचायत सीईओ नीलेख पारिख कर रहे हैं। श्री पारिख ने नईदुनिया को बताया कि ग्रामीण स्तर पर एटीएम कार्ड बांटे जाने की शुरुआत की गई है। इसके लिए ग्राम पंचायतों में कैम्प लगाकर बैंककर्मियों के माध्यम से लोगों को एटीएम कार्ड के इस्तेमाल के तरीके बताए जाएंगे। लेकिन एटीएम कहां तक कारगर होगा, इस सवाल पर सीईओ चुप्पी साध गए। गौरतलब है कि जिले में मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों की संख्या तकरीबन 2 लाख 85 हजार 790 है। वहीं, जॉब कार्ड की संख्या 10 लाख के पार है।

एटीएम के खस्ताहाल

बता दें कि ग्रामीण अंचल में मजदूरों को एटीएम कार्ड की सुविधा देने के लिए विभाग बैंक के माध्यम से कैम्प लगाने जा रहा है। बावजूद इसके जिले के सुदूर अंचल में लगे एटीएम बूथों की उपलब्धता महज बैंक के टाइम में ही होती है। त्योंथर तहसील के सोनौरी में लगा यूबीआई का एटीएम, सोहागी के मझगवां में लगा स्टेट बैंक का एटीएम, त्योंथर में लगा पीएनबी का एटीएम, जवा में लगा एसबीआई का एटीएम, सेमरिया में लगा यूबीआई का एटीएम, 11 से 5 तक ही नोट उगलते हैं। बैंक बंद होने के साथ ही यह एटीएम भी बंद हो जाते हैं।

इस तरह लगेंगे कैम्प

जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि मुख्य सचिव मप्र शासन के निर्देशानुसार 1 से 31 दिसंबर तक प्रत्येक ग्राम पंचायत में बैंक के विशेष कैम्प लगाने के निर्देश मिले हैं। जिसमें विमुद्रीकरण की समस्या का समाधान किया जा सके। प्रत्येक दिन एक ग्राम पंचायत में कैम्प का आयोजन होगा। जिसमें बैंक के अधिकारी, पंचायत सचिव, ग्रामीण विभाग के प्रतिनिधि, सरपंच, रोजगार सहायक उपस्थित रहेंगे। कैम्प में जन-धन योजना के अंतर्गत खोले गए खातों व खाताधारकों को पासबुक भी दिया जाना सम्मिलित किया गया है। कैंप में श्रमिक वर्ग पर खास ध्यान रहेगा। जिनकी मजदूरी बैंक के माध्यम से भुगतान होती रही है।

इन कार्डों का होगा वितरण

शिविर में खाता धारकों को डेबिट कार्ड, रु-पे कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-वॉलेट सहित अन्य जानकारियां व कार्ड वितरित किए जाएंगे। कल तक विड्रॉल फार्म में अंगूठा लगाकर मजदूरी प्राप्त करने वाले मजदूर अब पारिश्रमिक से शोरूमों में डेबिट कार्ड का कैसे इस्तेमाल करेंगे यह तो समझ के परे है। लेकिन योजना के तहत यह पूरी जानकारी श्रमिकों तक दी जानी है।

इन प्रश्नों का जवाब नहीं

साक्षर श्रमिकों के बजाए निरक्षर श्रमिकों के सामने हिन्दी व अंग्रेजी दोनों ही भाषा में अपठित होंगी। कार्ड का पासवर्ड भी सुरक्षित रखने की जवाबदारी भी विशेष होगी। दूसरे की मदद ले भी ली तो उन्हें यह पता लगाने के लिए कि मजदूरी आई कि नहीं एटीएम की दूरी तय करनी पड़ेगी। हालांकि विभाग व अधिकारी एक महीने के अंदर पूरी तरह जागरुकता फैलाने और एटीएम कार्ड सहित अन्य कार्ड इस्तेमाल करने के हुनर से मजदूरों को भी वाकिफ कराने का दावा कर रहे हैं।

विशेषज्ञ देंगे ट्रेनिंग

मुहीम चलाकर लोगों को एटीएम चलाने की जानकारी दी जाएगी। साथ ही मजदूरों को एटीएम कार्ड भी उपलब्ध कराएं जाएंगे। कैम्प में जाने वाले विशेषज्ञ वहां के लोगों को इसकी ट्रेनिंग देंगे। शुरुआती समय में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन आगे आने वाले समय में हर श्रमिक कैशलेस बन जाएगा।

नीलेश पारिख, सीईओ, जिला पंचायत, रीवा