दैनिक जनघटना सिंगरौली

ऐसा प्रतीत होता है की सिंगराली जिले के संपूर्ण खनिज विभाग को कम देख पाने की बीमारी हो गई है जिससे उन्हें कोई अवैध खनन दिखाई ही नहीं देता जिले में बिना किसी माप दंड के धड़ल्ले से अनेक अवैध क्रेशर पत्थर की खदाने नदियों के बीच धारा में पुकलेन मशीनों द्वारा बालू का उत्खनन किया जा रहा है और जिम्मेदार आला अधिकारी कुंभकरणीय निद्रा में मस्त है क्युकी नोटो से उनके आंख कान मुख सब बंद कर दिए है और खनन माफिया बेरोकटोक के प्रकृति का दोहन कर दोनो हांतो से पैसे लूट रहे है।

नही समझ आती सरकार की दोरंगी नीत

एक तरफ शिवराज सरकार अवैध कारोबारियों, माफियाओं,तस्करों ,गुंडे बदमाशो पर सख्त कार्यवाही करने का दिखावा करती है तो दूसरी तरफ उन्हीं माफियाओं को संरक्षण देकर अवैध उत्खनन व प्रकृति का दोहन करवा रही  है जिसमे खनिज विभाग भी खनन माफियाओं का सहयोग कर रहा है।

सिंगरौली में रेत उत्खनन व भंडारण का खेल अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से संचालित है जिले में करीब दो दर्जन से ज्यादा जगहों पर रेत का भंडारण किया गया है लेकिन यहां के स्थानीय लोग महंगे दामों पर रेत खरीदने को मजबूर है वजह सिंगरौली  जिले की रेत यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड तक ऊंची दरों पर बेची जा रही है।
 

 सांसद , विधायक  कलेक्टर  भले ही लाख दावा करे कि जिले में रेत का अवैध खनन व भंडारण बिल्कुल नहीं है और लोंगो को सस्ते दरो में रेत मिल रही है लेकिन यह सरासर गलत है।जिले में इन दिनों एक ट्रैक्टर रेत की कीमत 5000 से 7000 है जबकि 500 फीट के हाईवे में 30000 से 32000 में रेत मिल रही है।

सूत्रों की माने तो जिले में करीब एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर रेत का अवैध भंडारण किया गया है जहां  इस बात की जानकारी खनिज अधिकारी ए के राय को भी है लेकिन श्रीमान को सुविधा शुल्क इतनी मिल रही है कि वह है कंपनी के सरपरस्त बने हुए है।

आखिर रेत के अवैध कारोबार में किसका संरक्षण ?

अंचल मेें रेत के अवैध उत्खनन को लेकर लम्बे समय से आवाज उठती रही है ओर कांग्रेस के विधायक व पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने तो इस मुद्दे को लेकर धरना देकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखा था। इसके बाद भी रेत का अवैध कारोबार नहीं रुक पा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि रेत के अवैध कारोबार में किसी न किसी का संरक्षण मिल रहा है. जिसके कारण अवैध उत्खनन करने वालो को किसी तरह का भय नहीं है। जिस तरह से अवैध रूप से रेत का अवैध भंडारण हो रहा है उससे शासन को करोड़ों का चूना लग रहा है, लेकिन इसके बाद भी सख्ती बरतना तो दूर की बात खनिज अधिकारी उधर नजर उठा कर भी नहीं देखना चाहते है।

डंप के नाम पर खेला जा रहा खेल

रेत नीति के हिसाब से जिस स्थान से रेत का खनन किया जाता है उससे 5 से 7 किमी तक के क्षेत्र में ठेकेदार रेत का डंप कर सकता है जबकि 50 किमी तक के क्षेत्र में अन्य नाम से डंप किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि सिंगरौली जिले में सिर्फ कागजों में नाम मात्र के रेत का डंप दर्शाया गया है जबकि रेत सीधे नदियों से निकाल कर सप्लाई किया जा रही है

 खनिज विभाग जांच के नाम पर कर रहा कोरम पूर्ति

अवैध उत्खनन का खेल किसी से छिपा नहीं है फिर भी जिम्मेदार आला अधिकारी अवैध उत्खनन के खिलाफ कुछ करना नही चाहते या फिर पैसे ने सब के आंख, कान, मुंह में पट्टी बांध रखी है यह तो आला अधिकारी ही जाने किंतु खनन माफियाओ से लिपटने हेतु सिंगरौली जिले को एक नई टीम की आवश्कता है साथ ही कप्तान को भी बदलने की प्रमुख आवश्कता है क्युकी सारा खेल सिंगरौली जिले के खनिज अधिकारी के सह पर ही खेला जा रहा है।
सिंगरौली जिले में रेत के खेल में हर कोई रंगा हुआ है जिसके कारण चाहकर भी रेत का अवैध उत्खनन बंद नहीं हो पा रहा है।