ग्वालियर | कोरोना संकट की वजह से आई कठिनाईयों से उबरकर शैली वर्मा अब अपने परिवार की खुशहाली की चादर में नए-नए रंग बुन रही हैं। खुशियों के रंग भरने में सरकार द्वारा पथ विक्रेताओं के कल्याण के लिये संचालित योजना ने भी उनकी मदद की है।
    हजीरा क्षेत्र की निवासी श्रीमती शैली वर्मा सिलाई - कढ़ाई कर अपने परिवार का भरण पोषण करती हैं। इस काम में उनके पति भी हाथ बटाते थे। थोड़ी आमदनी बढ़ी तो उन्होंने अपने छोटे से व्यवसाय को आगे बढ़ाने की सोची। इसी दौरान वैश्विक महामारी कोरोना ने पाँव पसारे और उनका काम धंधा लगभग टप्प हो गया। थोड़ी सी जमा पूँजी भी घर के खर्चे में धीरे-धीरे खत्म होने लगी। परिवार का गुजारा चलाने की चिंता शैली को खाए जा रही थी। कहीं से कोई आसरा नहीं दिख रहा था। पर उन्हें सरकार से मदद की आस जरूर थी, सो पहले की तरह इस बार भी उनकी आशा निरमूल साबित नहीं हुई।
    शैली वर्मा बताती हैं मुझे एक दिन पता चला कि प्रधानमंत्री स्व-निधि योजना के तहत सरकार पथ विक्रेताओं को अपना व्यवसाय फिर से खड़ा करने के लिये आर्थिक मदद देती है, सो मैंने भी अपना फार्म भर दिया। एक दिन नगर निगम से फोन आया कि तानसेन नगर के स्टेट बैंक जाओ, आपका लोन मंजूर हो गया है। मुझे बैंक से स्वनिधि योजना के तहत आसान शर्तों पर 10 हजार रूपए का ऋण मिला है। वे कहती हैं कि इससे हम एक और सिलाई मशीन खरीदेंगे और अपने सिलाई-कढ़ाई के कारोबार को ऊँचाईयों तक ले जायेंगे।
   शैली बताती हैं कि मेरी बिटिया जब पढ़ने लायक हुई थी तब भी हमने एक अच्छे प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराने की सोची। लेकिन फीस के पैसे हमारे पास नहीं थे। उस समय भी सरकार ने हमारी मदद की थी। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत मेरी बिटिया का दाखिला विद्या विहार स्कूल में हो गया था। वह  अब चौथी कक्षा में पहुँच गई है।
   दूसरी सिलाई की मशीन खरीदने के लिये बाजार जा रहीं शैली बहुत खुश थीं। उनका कहना था कि सरकार ने संकट के समय हम जैसे पथ विक्रेताओं की मदद कर पुण्य का काम किया है।