चतुर्थी तिथि प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
मंदिर की साफ-सफाई करें और गणेश जी के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
अब सिंदूर से गणेश जी का तिलक करें और फल-फूल आदि अर्पित करते हुए विधिवत् पूजन करें।
गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करें व लड्डू या मोदक का भोग लगाएं।
पूजन पूर्ण होने के बाद क्षमायाचना करें और गणेश जी की आरती करें।
इस दिन चंद्र दर्शन और अर्घ्य का भी विधान है।