ग्वालियर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में पति-पत्नी के रिश्तों का अजीबो-गरीब वाक्या सामने आया है. यहां सुहागरात पर पति-पत्नी के बीच हुई पहली बातचीत इस कदर बिड़ग गई कि शादी के 20 दिन बाद ही मामला तलाक पर पहुंच गया. दोनों ने एक-दूसरे को ‘कुछ नहीं छिपाएंगे’ की कसम दी और बातें करने लगे. शुरुआत पत्नी को करनी थी. उसने रोते हुए पति को बता दिया कि उसके मामा के लड़के ने उसका रेप किया था. यहीं मामला बिगड़ गया. मामला 2019 का है, लेकिन कोविड के चलते इस पर फैसला नहीं हो सका था.

तलाक के आवेदन के बाद पति ने कोर्ट को बताया था कि पत्नी ने इतनी बड़ी बात छुपाकर गलत किया. हालांकि, इस दौरान पत्नी की ओर से कोई कोर्ट में पेश नहीं हुआ. सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. जानकारी के मुताबिक, 25 साल का पति एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है. उसकी शादी दिसंबर 2019 में धूमधाम से हुई. उस वक्त पत्नी की उम्र 22 साल थी. फेरों के बाद जब दोनों अपने कमरे में पहुंचे तो बातें शुरू हुईं. उस दौरान पत्नी ने पति को दुष्कर्म का बता दिया. इसके बाद पति ने पत्नी के परिजनों को भी फोन लगाकर ये बात छुपाने का कारण पूछा. इस दौरान दुल्हन लगातार रोती रही.
दुष्कर्म की बात सुनते ही पति गुस्से से पागल हो गया. उसने परिवार को सब-कुछ बता दिया. इसके बाद फैमिली कोर्ट में तलाक का केस लगाने का फैसला किया गया. चूंकी, कोविड के चलते लंबे समय तक कोर्ट बंद ही रही, इसलिए फैसला नहीं हो सका. इस केस की खास बात ये है कि पति ने पत्नी के दुष्कर्म पीड़ित होने को आधार नहीं बनाया है, बल्कि शादी से पहले बात को छुपाकर धोखा देने को आधार बनाया है.

जानकारी के मुताबिक, जब से ये मामला फैमिली कोर्ट में आया है, तभी से पत्नी पक्ष कीओर से कोई पेश नहीं हुआ. कई बार की पेशियों के बाद कोर्ट ने एक पक्षीय सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस मामले को लेकर कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अमूमन पुरुष तलाक के लिए व्यभिचार, महिला का संन्यासी होना या हिंसा जैसे आरोपों पर केस का आधार बनाता है. लेकिन, इस मामले में शादी से पहले सत्य नहीं बताना और धोखा देना तलाक का आधार बनाया गया है. इस तरह का आधार बनता ही नहीं है. अगर ये आधार बनने लगा तो  रेप पीड़िता लड़कियों की शादी ही नहीं हो सकेगी.