भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का महापर्व गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) मनाया जाता है. सभी देवों में प्रथम आराध्य गणेशजी की पूजा-अर्चना करने उन्हें प्रसन्न करने का महापर्व गणेश चतुर्थी इस वर्ष 10 सितंबर, दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. पूरी दुनिया में इसी दिन गणपति बप्‍पा घर-घर पधारेंगे अनंत चतुर्दशी के दिन 19 सितंबर को उन्‍हें विदाई दी जाएगी. हमारे देश में इन 10 दिनों में गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है.
सनातन धर्म में भगवान गणेशजी को प्रथम पूजनीय का दर्जा प्राप्त है, अर्थात किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से पहले गणेशजी की पूजा-अर्चना की जाती है. अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो जीवन की तमाम परेशानियां दूर हो जाती हैं बिना किसी अमंगल के कोई भी काम पूरा होता है. उन्होंने आगे कहा कि गणेशजी की पूजा-अर्चना करने से इंसान को किसी भी तरह के रोग, आर्थिक समस्या, नौकरी, मकान, व्यवसाय, संतान से संबंधित समस्याओं का हल भी मिल जाता है.

गणेश चतुर्थी की तिथि पूजा-विधि, जानें पारस भाई की जुबानी
साल-साल भर लोग गणेश चतुर्थी का इंतजार करते रहते हैं. जिस दिन लोगों के घरों में बप्पा विराजमान होते हैं, तब से अगले 10 दिनों तक भक्त उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. इस दौरान भक्त अपने आराध्य देव गणेशजी को तरह-तरह के भोग अर्पित करते हैं इस त्योहार के आखिरी दिन धूमधाम से विसर्जन कर गणेशजी को विदाई दी जाती है.

गणेश चतुर्थी : 10 सितंबर, दिन शुक्रवार
शुभ मुहूर्त : सुबह 11.02 बजे से लेकर दोपहर 1.32 बजे तक
अवधि : 2 घंटे 29 मिनट तक
वर्जित चंद्रदर्शन का समय : सुबह 9..11 बजे से लेकर शाम 8.25 बजे तक
अवधि : 11 घंटे 41 मिनट तक
चतुर्थी तिथि की शुरुआत : 10 सितंबर को 12.18 बजे से
चतुर्थी तिथि का समापन : 10 सितंबर को 9.57 बजे तक

पूजन-विधि
गणेश चतुर्थी के दिन जल्दी उठें पहले स्नान करें. फिर घर में बप्पा की मूर्ति लाएं पूजा स्थल पर उन्हें पूरे मान-सम्मान से स्थापित करें.इसके बाद गणपति बप्पा को लड्डू, मोदक दूर्वा अर्पित करें.आपको जान कर अचरज होगा कि भगवान गणेश एकमात्र ऐसे देव हैं जिनको दूर्वा यानी दूब चढ़ाई जाती है. दूर्वा श्री भगवन गणेशजी को बेहद प्रिय है, इसलिए 21 दूर्वा को इकट्ठा करके एक गांठ बनाए उसे गणपति जी के मस्तक पर चढ़ाए, शुभ फल मिलेंगे.आप जितने भी दिन भगवान गणेशजी को अपने घर में रखते हैं, उतने दिन नियम से दोनों पहर में उनकी पूजा जरूर करें.पूजा में पंचामृत, लाल कपड़ा, फल, फूल, भोग, कलावा, अक्षत, नारियल, लौंग, पांचों मेवा जरूर शामिल करें.भगवान गणेशजी की पूजा उनकी आरती से पूरी होती है. भक्तों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए.