ओलंपिक खेलों में सेक्सयुअल एक्टिविटी के चलते हर बार लाखों की संख्या में खिलाड़ियों को कंडोम बांटे जाते हैं। इसकी शुरुआत Olympic में सन् 1988 के ओलंपिक से हुई थी। हालांकि, IOC ऐसी उम्मीद करती है कि खिलाड़ी कंडोम का उपयोग करने की बजाय उसे प्रतीक के तौर पर अपने देश वापस ले जाएं।
 
ओलंपिक में condom का इतना उपयोग होता है कि सिडनी ओलंपिक में सिर्फ़ सत्तर हज़ार कंडोम बंटे जो एक हफ़्ते में ख़त्म हो गए। इसी तरह लंदन ओलंपिक में कंडोम की कमी हो गई और कंडोम वेंडिंग मशीनों से भी कंडोम साफ़ हो गए। तब खिलाड़ियों ने हंगामा किया और कंडोम उपलब्ध कराए गए।
 
रियो ओलंपिक में कंडोम उपयोग करने का रिकॉर्ड तोड़ दिया। लगभग पांच लाख कंडोम बांटे गए। सिर्फ पुरुष कंडोम ही नहीं बल्कि लेडीस कंडोम का भी उपयोग किया गया। 
 
कई खिलाड़ी युवतियों की मांग थी कि उन्हें लेडीज़ कंडोम दिए जाएं,क्योंकि कई बार साथी पुरूष खिलाड़ी बिना कंडोम सेक्स करने लगते हैं। ओलंपिक के कंडोम अच्छी क्वालिटी के रहते हैं ताकि वाइल्ड सेक्स में भी ना फटें
 
ओलंपिक में जमकर सेक्स होता है,ओलंपिक के आंकड़ों के अनुसार भाग लेने वाले सत्तर से पचहत्तर प्रतिशत महिला और पुरूष खिलाड़ी ओलंपिक विलेज में सेक्स करते हैं। इसीलिए कंडोम बांटे जाते हैं ताकि सेफ़ सेक्स हो।
 
पूरी दुनिया से ओलंपिक में खिलाड़ी जुटते हैं और सेक्स के लिए अपना जोड़ा तलाशते रहते हैं। कॉलगर्ल और प्लेब्वाए की भी सेवा ली जाती है। गे सेक्स भी होता है और लेस्बियन खिलाड़ी महिला के साथ भी सेक्स करती हैं।
 
कंडोम बांटकर एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने का काम भी किया जाता है। कई मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो ओलिंपिक गेम्स में आने वाले 75 फीसदी खिलाड़ी सेक्शुअल एक्टिविटी (Sexual Activity) में शामिल होते हैं।