नई दिल्ली । भारतीय सीमा के किनारे चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। सीमावर्ती राज्यों में चीन 16 नए एयरबेस बनाने में जुटा हुआ है। सभी एयरबेस की लोकेशन लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के नजदीक पड़ती हैं। इंटेलीजेंस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह भारत-नेपाल-तिब्बत की सीमा से बहुत दूर नहीं है। इनमें से अधिकतर शिंजिंयान प्रांत में हैं, जिसकी सीमा, भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और रूस के साथ लगती है। गौरतलब है कि यह इलाका लद्दाख की सीमा से जुड़ा है, जो पिछले एक साल से भारत और चीन के बीच झगड़े की वजह बना हुआ है।  अरुणाचल प्रदेश के ठीक दूसरी तरफ दो नए एयरपोर्ट बनाने की तैयारी भी चल रही है। भारतीय सीमा के नजदीक पहले से ही तीन एयरपोर्ट, अली गुंसा, बुरांग और ताश्कोरगम हैं। यह एयरपोर्ट सिविल और मिलिट्री दोनों तरीकों से इस्तेमाल के लिए बनाए गए हैं। इसमें ताश्कोरगम एयरपोर्ट कराकोरम रेंज के नजदीक है। यह फर्स्ट टायर कैटेगरी का एयरपोर्ट और सबसे महत्वपूर्ण है। चीन के सूदूर पश्चिमी इलाके में बन रहा एयरपोर्ट पिछले साल लद्दाख में तनाव के बाद बनना शुरू हुआ था। चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को देखते हुए यह एयरपोर्ट चीन के लिए बहुत रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण ठिकाना बन सकता है। इस एयरपोर्ट के जून 2022 तक शुरू हो जाने की उम्मीद है। साफ है कि चीन पूरी तरह से उन इलाकों पर फोकस कर रहा है, जहां से वह भारत पर करीबी नजर रख सकता है। कराकोरम रेंज लद्दाख के उत्तर में स्थित है और भारत और चीन दोनों के लिए सामरिक महत्व रखता है। भारतीय पकड़ वाला महत्वपूर्ण सियाचिन ग्लेशियर पूर्वी कराकोरम रेंज में पड़ता है और चीन पाकिस्तान इकॉनिमक कॉरिडोर भी कराकोरम रेंज से गुजरती है। इन सबको ध्यान में रखते हुए चीन, कराकोरम पास के करीब पांच एयरपोर्ट बना रहा है। इनमें से होतान एयरबेस तो लद्दाख के करीब और कराकोरम पास से करीब 259 किमी ही दूर है। यहां लड़ाकू विमानों को रखा गया है। देखा जाए तो डिप्लोमैटिक और मिलिट्री बातचीत के दौरान भी चीन ऐसे इंतजाम में लगा है, जिनका इस्तेमाल लद्दाख में मुश्किल पड़ने पर किया जा सकता है।