भारत के लगभग सभी घरों में इस मशीन का उपयोग होता है। यह एक वाटर मोटर पंप है जो पानी को घर की टंकी से ऊपर छत तक भेजने का काम करता है। बोलचाल की भाषा में इसे टुल्लू पंप कहा जाता है। सवाल यही है कि जब इस मशीन का नाम वाटर मोटर आसानी से लिया जा सकता है तो फिर इसे टुल्लू पंप क्यों कहते हैं। वो कौन है जिसने इस मशीन का नाम टुल्लू पंप कर दिया। आइए आज एक मजेदार कहानी पढ़ते हैं:- 


वाटर मोटर का नाम TULLU PUMP कैसे पड़ा
बात सन 1960 की है। श्री विजय कुमार साह ने उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी में अपनी नई कंपनी TULLU TOP के इंजीनियर द्वारा बनाए गए वाटर मोटर पंप TULLU TOP Deluxe (AC/DC) 1/20 HP को लांच किया। इससे पहले तक ऐसी कोई मशीन नहीं थी जो इतनी छोटी हो और घरेलू उपयोग में ली जा सकती हो। यह काफी छोटा पंप था और कोई भी व्यक्ति आसानी से इसे यहां से वहां उठाकर ले जा सकता था। क्वालिटी के मामले में यह वाटर मोटर पूरे देश में सबसे ज्यादा विश्वसनीय मानी गई। यही कारण है कि यह मशीन पूरे भारत में तेजी से लोकप्रिय होती चली गई और इस मशीन की लोकप्रियता का आलम यह था कि लोग सामान्य बातचीत में वाटर मोटर को TULLU PUMP कहकर पुकारने लगे। यह ठीक वैसा ही है जैसे वाशिंग पाउडर निरमा और वनस्पति घी को डालडा के नाम से पुकारा जाता था। 

 

TULLU PUMP से पहले लोग पानी को छत पर कैसे ले जाते थे 
पानी का परिवहन अपने आप में एक बहुत बड़ी समस्या थी। हर घर में एक अभियान शुरू होता था। घर का प्रत्येक सदस्य इसमें योगदान करता था। यह बात उन दिनों की है जबकि आबादी वाले क्षेत्रों में पानी की सप्लाई शुरू हो गई थी। लोगों को दूर नदी, तालाब अथवा कुओं में पानी भरने के लिए नहीं जाना पड़ता था। आम जनता सार्वजनिक वाटर सप्लाई से बाल्टी की मदद से घर के ग्राउंड फ्लोर पर रखी टंकी को भरते थे और फिर उस टंकी से ठीक उसी प्रकार बाल्टी के माध्यम से एक कमरे से दूसरे कमरे में या फिर छत पर ले जाया जाता था। इसमें काफी श्रम और समय बर्बाद होता था। TULLU PUMP ने एक सस्ता और उपयोगी समाधान दिया। इसीलिए उसने तेजी से बाजार पर अपनी पकड़ बना ली है और आज एक कंपनी का नाम, सभी प्रकार की वाटर मोटर का नाम बन गया है।