नई दिल्ली । किसी एचआईवी संक्रमित शख्स को अपने पार्टनर की सहमति या असहमति से फिजिकल रिलेशन बनाने पर हत्या के प्रयास का दोषी नहीं माना जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले पर सुनाए गए फैसले में यह टिप्पणी की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यौन हिंसा या दुष्कर्म के मामलों में अपराधी का एचआईवी पॉजिटिव होना सजा सुनाते समय माना जाने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन इसके चलते उसे आईपीसी की धारा-307 (हत्या का प्रयास) का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस विभु बाखरू की बेंच ने फैसला सुनाते हुए नाबालिग सौतेली बेटी से रेप करने वाले एचआईवी पॉजिटिव शख्स को हत्या के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने उसे रेप में दोषी करार दिए जाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाणों के यह माल लिया कि एचआईवी पॉजिटिव द्वारा यौन संबंध बनाने पर पीड़िता संक्रमण का शिकार हुई है, जिससे उसकी जान चली जाएगी।