इन्दौर । लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के चलते गत 25 मार्च से बंद पड़े अन्नपूर्णा आश्रम एवं मंदिर के जीर्णोद्धार का काम एक बार फिर देवउठनी एकादशी, बुधवार 25 नवंबर को सुबह 10.30 बजे से शुरू हो जाएगा। यहां लगभग 6 हजार वर्गफीट क्षेत्र में वर्तमान मंदिर के स्थान पर नया मंदिर बनाने की योजना है। मौजूदा गर्भगृह में स्थापित माता अन्नपूर्णा, कालकाजी एवं सरस्वती की दिव्य प्रतिमाएं इस नए मंदिर में स्थापित करने की योजना है। नए मंदिर का शिखर 81 फीट ऊंचा रहेगा। आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी एवं न्यासी मंडल के श्याम सिंघल ने बताया कि वर्तमान मंदिर लगभग 60 वर्ष प्राचीन है। इसकी स्थापना सन 1959 में ब्रम्हलीन महामंडलेश्वर स्वामी प्रभानंद गिरी महाराज ने की थी। भक्तों की निरंतर बढ़ रही संख्या को देखते हुए वर्तमान मंदिर एवं बाहर का स्थान अब छोटा महसूस होने लगा है, इसलिए आश्रम की यज्ञशाला को हटाकर कुछ जगह पर भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा। नया मंदिर पूरी तरह मार्बल से बनेगा। वर्तमान मंदिर की जगह पर चबूतरा बनाकर एक दीप स्तंभ बनाया जाएगा। गत वर्ष 29 सितंबर को भूमिपूजन के बाद यज्ञशाला को हटाने का काम शुरू किया गया था। सितंबर से मार्च की अवधि में यज्ञशाला हटा दी गई है और नए मंदिर के निर्माण के लिए नींव खोदने का काम भी लगभग पूरा होने आया था लेकिन 25 मार्च से ही लाॅकडाउन के चलते यह काम ठप्प पड़ा हुआ है। अब न्यासी मंडल के विनोद अग्रवाल, गोपालदास मित्तल एवं अन्य सदस्यों के मार्गदर्शन में भव्य मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है। आश्रम के संत स्वामी जयेंद्रानंद के अनुसार प्रस्तावित मंदिर का मॉडल भी बनकर तैयार हो चुका है। नए मंदिर के निर्माण में भक्तों का सहयोग भी लिया जाएगा। नए मंदिर का निर्माण त्र्यंबकेश्वर नासिक में अन्नपूर्णा मंदिर का निर्माण करने वाले राजस्थान के प्रसिद्ध मकराना मार्बल के शिल्पकारों द्वारा किया जाएगा। इस मंदिर के निर्माण में एक से दो वर्ष का समय लग सकता है। नया मंदिर बनने के बाद यह स्थान और अधिक व्यवस्थित आकर्षक और सुंदर बन सकेगा।