वाशिंगटन । चीन के लगातार बढ़ते विस्तारवादी हौसले पर लगाम लगाने के लिए दक्षिण एशिया में शीघ्र ही मजबूत गठबंधन बनाए जाने की कवायद जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विश्वस्त सहयोगी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भारत यात्रा के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि चीन के खिलाफ दक्षिण एशिया में जल्द एक मजबूत गठबंधन बनाए जाने की तैयारी चल रही है। भारत के बाद श्रीलंका पहुंचे पोम्पियो से श्रीलंका के राष्‍ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने कहा है कि वे किसी देश की आक्रामकता के समर्थन में नहीं हैं और उनकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं होगा। उधर श्रीलंका को साधने के बाद पोम्पियो ने घोषणा की कि अमेरिका जल्द मालदीव में एक दूतावास खोलेगा। श्रीलंका ने कहा है कि वे हमेशा तटस्‍थ नीति अपनाएंगे और महाशक्तियों के गुटों के बीच चल रहे संघर्ष में शामिल नहीं होंगे। श्रीलंका के राष्‍ट्रपति का बयान अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से मुलाकात के बाद आया है। इससे पहले माइक पोम्पियो ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे से मुलाकात की और इस दौरान पारदर्शी व्यापार और निवेश सहित आर्थिक मामलों, कोविड-19 और दोनों स्वतंत्र लोकतांत्रिक देशों की साझा प्रतिबद्धताओं सहित विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। भारत से मंगलवार को दो दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका पहुंचे अमेरिका के शीर्ष मंत्री यहां के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करेंगे क्योंकि अमेरिका इलाके में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना चाहता है और स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाए रखने के लक्ष्य को और आगे बढ़ाना चाहता है।
श्रीलंका को अपनी तरफ करना चाहता है अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले हफ्ते कहा था कि इस यात्रा का मकसद मजबूत और संप्रभु श्रीलंका के साथ साझेदारी की अमेरिकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करना और स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए हमारे साझे लक्ष्य को आगे बढ़ाना है। चीनी सेना रणनीतिक रूप से अहम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी ताकत दिखा रही है। वह दक्षिण चीन सागर और पूर्व चीन सागर में भी क्षेत्रीय विवादों में शामिल है। यही नहीं चीन श्रीलंका के हंबनटोटा में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है और उसने श्रीलंका से इसे 99 साल के ल‍िए लीज पर ले ल‍िया है। कोलंबो स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी ट्वीट कर बताया कि पोम्पियो ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और पारदर्शी व्यापार और निवेश के आधार पर आर्थिक साझेदारी, कोविड-19 महमारी के बाद अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने सहित लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को लेकर साझा प्रतिबद्धता पर चर्चा की। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में पोम्पियो अमेरिका के सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं जिन्होंने श्रीलंका की यात्रा की है। पोम्पियो की इस यात्रा से पहले चीनी दूतावास ने आरोप लगाया था कि अमेरिका श्रीलंका को धमका रहा है।