लंदन । ब्रह्मांड में अनेक गृहों और आकाशगंगाओं की उपस्थिति को लेकर खगोल विज्ञानी सतत प्रयत्नशील हैं। इन दिनों दुनिया के कई देशों का ध्यान मंगल ग्रह के अभियानों पर है इस महीने चीन और यूएई ने मंगल के लिए अपने अंतरिक्ष यान भेजे। चीन ने उसके साथ एक रोवर भी भेजा है। अगस्त में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा भी अपना एक और रोवर मंगल के लिए प्रक्षेपित करने जा रहा है। इस समय तक मंगल ग्रह पर जितने भी अध्ययन हुए उनसे यही पता चला है कि मंगल पर जीवन होने के संकेत नहीं हैं। लेकिन ताजा शोध में वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह की सतह के नीचे जीवन के संकेत हो सकते हैं। वैसे तो वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं कि फिलहाल मंगल ग्रह पर इंसानों के रहने के हालात बिलकुल अनुकूल नहीं हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ऐसे संकेत लगातार मिलते रहे हैं काफी पहले मंगल पर जीवन रहा होगा। मंगल की सतह के नीचे काफी मात्रा में पानी होने की भी संभावना पाई गई है। ऐसे वैज्ञानिकों को लगता है कि मंगल की सतह पर जीवन के लिए हालात भले ही बहुत प्रतिकूल हों, लेकिन हो सकता है कि सतह के नीचे जीवन हो।
हाल में साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन दर्शाता है कि मंगल की सतह के नीचे जीवन की अनुकूलता के हालात होने की ज्यादा संभावना है। सतह के नीचे हालात कम विपरीत है और वहां पानी होने के संकेत भी मिल चुके हैं। इसके अलावा शोध का दावा है कि सतह पर लगातार गैलेक्टिक कॉस्मिक रेज (जीसीआरएस) जीवन के लिए जरूरी ऊर्जा प्रदान करने का काम कर सकती है। इस अध्ययन में कई न्यूमेरिकल मॉडल्स को शामिल किया गया है। अंतरिक्ष अभियानों के वर्तमान आंकड़ों के अलावा पृथ्वी की गहरी गुफाओं में पाए गए इकोसिस्टम इसमें शामिल किए गए हैं। इससे उस जीवन की प्रक्रिया का पता चला जो सतह के नीचे पनप सकती है। इससे यह भी पता चला कि ऐसे जीवन के बारे में मंगल पर उतरने वाले इंसान भी पता लगा सकते हैं। इस हिस्से का बारे में अभी तक अन्वेषण नहीं किया गया है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ने भविष्य में होने वाले अभियानों के जरिए मंगल की सतह के नीचे अन्वेषण कर सकेंगे। यूरोपीय स्पेस एजेंसी और रूसी रोसकोसमोस मंगल की सतह और उसके नीचे का अध्ययन करने के लिए रोवर भेजने की योजना बना रहे हैं। यह योजना टल गई थी क्योंकि इसे आगे की टेस्टिंग की जरूरत थी। अब इसे दो साल बाद भेजा जाएगा।
गौरतलब है कि नासा का पर्सिवियरेंस का मंगल पर एक प्रमुख लक्ष्य मंगल की सतह और उसके नीचे का अध्ययन कर यह जानना भी है कि क्या वहां कभी इतिहास में जीवन रहा था। इसके अलावा पर्सिवियरेंस मंगल की सतह के नीचे पानी के स्रोतों की खोज भी करेगा। जिससे वहां इंसानों के पहुंचने पर पानी उपलब्ध हो सके। अबूधाबी की एनवाईयू के स्पेस साइंस सेंटर के वैज्ञानिक दिमित्र अत्री ने एक बयान में कहा, मंगल की सतह के दो मीटर की गहराई जैसे कठोर वातावरण में जीवन के बारे में विचार करना ही अपने आप में उत्साहित करता है। जब रोजोलिंद फ्रैंकलिन रोवर एक्सोमार्स मिशन में सतह पर खुदाई करेगा, वह वहां सूक्ष्मजीवन ढूंढने में पूरी तरह से सक्षम होगा और इस मामले में अहम रोशनी डाल सकेगा। यह रोवर साल 2022 में प्रक्षेपित किया जाएगा। मंगल पर जीवन के संभावना के लिए यूं ही जोर नहीं दिया जा रहा है। वैज्ञानिकों को इस बात के ठोस संकेत मिले हैं कि कभी मंगल पर जीवन के अनुकूल हालात थे। इसके अलावा वहां जीवन के अनुकूल हालात पैदा करने और कुछ इलाकों को रहने लायक बनाने पर भी शोध चल रहा है।