मध्य प्रदेश में पहली बार तेंदुए का सीटी स्कैन भोपाल स्थित राज्य पशु चिकित्सालय जहांगीराबाद किया गया। उसके शरीर में धातुओं के अवशेष होने की आशंका है। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही आधिकारिक रूप से इसका खुलासा होगा और इलाज किया जाएगा। तेंदुआ इंदौर के चिड़ियाघर से लाया गया था। वन विहार नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर अशोक कुमार जैन ने बताया कि तीन माह पहले छह साल के नर तेंदुए को इंदौर वन विभाग द्वारा जंगल से पकड़ा गया था। उसे इंदौर चिड़ियाघर में रखकर इलाज कर रहे थे, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं आ रहा था। उसे दिखना बंद हो गया है। वह लगातार असहज हो रहा था।

इस पर वन्यप्राणी विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार ने सीटी स्कैन करने की मंजूरी दी, तब उसे इंदौर से सुबह विशेषज्ञों की टीम वन विहार लेकर आई। यहां पर वन विहार नेशनल पार्क के वन्यप्राणी विषेशज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में प्राथमिक जांच की गई। उसके बाद दोपहर में उसे राज्य पशु चिकित्सालय लेकर गए, जहां बेहोश कर सीटी स्कैन किया गया। इस प्रक्रिया में डेढ़ घंटे लगे हैं। उसे वापस इंदौर भेज दिया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में एक बार भालू का सीटी स्कैन किया जा चुका था।

तब बाघ की जांच करने पार्क में लाई गई थी मशीन

वर्ष 2017 में बैतूल के राठीपुर जंगल में एक बाघ जख्मी मिला था। तब उसे वन विहार नेशनल पार्क में शिफ्ट किया था उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी इसलिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी विशेषज्ञ डॉ. गुरुदत्त तिवारी व डॉ. अतुल गुप्ता ने सीआर्म जांच करने का निर्णय लिया था। मशीन पार्क के पास नहीं थी तब राज्य पशु चिकित्सालय से सीआर्म मशीन पार्क लाई थी। जांच रिपोर्ट में बाघ के शरीर में धातु के टुकड़े मिले थे, हालांकि इलाज के बावजूद वह नहीं बच पाया था। बता दें कि स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ जबलपुर के वन्यप्राणी विषेशज्ञ पूर्व में बाघों की कलर सोनोग्राफी, सर्जरी, हाथी, तेंदुए, चीतल, हिरण का एक्स-रे कर चुके हैं। सीटी स्कैन वहां भी अब तक किसी वन्यप्राणी का नहीं हुआ है, क्योंकि जरूरत ही नहीं पड़ी थी।