काठमांडू | महीनों तक चीन के इशारे पर भारत के साथ तनाव बढ़ाने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दोनों नेताओं में बीतचीत की जानकारी देते हुए कहा कि पीएम मोदी को नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने फोन किया था। पीएम ओली ने सरकार और देश के लोगों को 74वें स्वतंत्रता दिवस और हाल ही में भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य चुने जाने को लेकर बधाई दी।

विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि दोनों ही नेताओं ने कोविड-19 के खिलाफ जंग में एकजुटता जाहिर की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत इस मामले में नेपाल को मदद देना जारी रखेगा। इससे पहले ओली ने ट्वीट किया, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों को 74वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं। भारत के लोगों के लिए और अधिक प्रगति और संपन्नता की कामना है।''

पीएम मोदी और ओली के बीच पिछली बार 10 अप्रैल को फोन पर बातचीत हुई थी। तब दोनों नेताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर बातचीत की थी। ओली ने अब ऐसे समय में मोदी से संपर्क साधा है जब नेपाल के विदेश सचिव और भारतीय राजदूत के बीच दो दिन बाद बातचीत होने जा रही है। दोनों पक्ष भारत के सहयोग से नेपाल में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। 

दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई यह बातचीत इसलिए अहम है क्योंकि नेपाल द्वारा नए राजनीतिक नक्शे में भारतीय इलाकों को शामिल किए जाने की वजह से पैदा हुए तनाव के बाद पहली बार सर्वोच्च स्तर पर बातचीत हुई है। पड़ोसी देश में भारत कई तरह के विकास कार्यों में सहयोग कर रहा है और दोनों देशों के बीच सदियों से बेहद दोस्ताना रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में केपी शर्मा ओली की सरकार ने भारत के साथ तनाव बढ़ाने वाले कदम उठाए और बयानबाजी से आग में घी डालने का काम किया है।

नेपाल सरकार ने मई में देश का नया राजनीतिक नक्शा पास किया जिसमें भारतीय इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को शामिल किया गया। भारत ने कहा था कि यह नक्शा ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। भारत ने यह भी कहा था कि यह दोनों देशों में किसी विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने के आपसी समझ का भी उल्लंघन हैं।  

इस विवाद के बाद से ही दोनों देशों के बीच बातचीत बंद थी। हाल ही में नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा था कि वे भारत से बातचीत को लेकर प्रयास कर रहे हैं। नेपाल सरकार ने कई पूर्व मंत्रियों और विशेषज्ञों से राय ली थी कि किस तरह दोबारा भारत के साथ बातचीत को बहाल किया जाए।