• मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में तिरंगा फहराया, मंच से कोरोना वॉरियर्स का अभिनंदन किया
  • नीतीश ने कहा- पहले 20 हजार कोरोना टेस्ट होते थे, अब यह आंकड़ा एक लाख 20 हजार पहुंचा, टेस्टिंग और बढ़ाने का लक्ष्य

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में तिरंगा फहराया। इसके बाद आर्मी, सीआरपीएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ, बीएमपी, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ सैप, डीएपी, होमगार्ड और एनसीसी की परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। इसके बाद सीएम ने मंच से कोरोना वॉरियर्स का अभिनंदन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि बिहार और देश के साथ पूरा विश्व कोरोना से लड़ाई लड़ रहा है। इसमें कोरोना वॉरियर्स का सबसे अहम योगदान है। इनके कार्यों को हमेशा याद रखा जाएगा। इससे पहले नीतीश ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी झंडा फहराया।

तेज से बढ़ रही कोरोना टेस्टिंग की संख्या
नीतीश ने कहा कि बिहार में कोरोना टेस्टिंग की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पहले हर रोज 20 हजार जांच होती थी और अब यह आंकड़ा एक लाख 20 हजार प्रतिदिन पहुंच गया है। राज्य में और टेस्टिंग बढ़ाने का लक्ष्य है। गांव में भी कोरोना की जांच हो रही है। अच्छी बात है कि इस बीमारी से लोग तेजी से ठीक भी हो रहे हैं।

हर खेत तक पानी पहुंचाने का दावा
नीतीश के भाषण में थोड़ी चुनावी झलक भी दिखी। सीएम ने कहा कि जनता ने अब तक मौका दिया तो राज्य की हर व्यवस्था सुधार दी। आगे जनता मौका देगी तो और काम करेंगे। मंच से बड़ा ऐलान करते हुए नीतीश ने कहा कि हमारा अगला लक्ष्य है- हर खेत तक पानी पहुंचाना। नल-जल योजना के जरिये हर घर तक पानी पहुंचा दिए। अब किसान का कोई खेत पानी के बिना नहीं रहेगा।

नीतीश ने कहा कि इस वक्त बिहार एक साथ दो आपदाओं से जूझ रहा है। एक तरफ कोरोना लगातार पैर पसार रहा है। वहीं, दूसरी तरफ उत्तर बिहार के जिलों में 75 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। एक साथ दोनों मोर्चे पर लड़ाई लड़ रहे हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों के खाते में सरकार 6-6 हजार रुपए दे रही है।

शिक्षकों को तोहफा
मुख्यमंत्री ने मंच से शिक्षकों को भी तोहफा दिया। नीतीश ने ऐलान किया कि नियोजित शिक्षकों को जल्द सेवा शर्त की सुविधाएं मिलेंगी। इसकी घोषणा जल्द कर दी जाएगी। नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इसके अलावा 33916 शिक्षकों को बहाली होगी।

शिक्षा से बदली बिहार की तस्वीर
नीतीश ने कहा कि जब 2005 में एनडीए सत्ता में आई थी तब बिहार बदहाली के दौर से गुजर रहा था। ज्यादातर लड़कियां पढ़ने के लिए स्कूल नहीं जाती थी। हमने साइकिल और पोशाक योजना शुरू की और लोगों से आग्रह किया कि बच्चों को स्कूल भेजें। बच्चियों के पढ़ने से बड़ा असर बिहार में दिखा। दसवीं पास लड़कियों का प्रजजन दर दो से भी कम है। वहीं, जो लड़कियां इंटर या उससे आगे की पढ़ी हैं उनका प्रजनन दर 1.7 है। यह दोनों औसत राष्ट्रीय दर से कम है।