नई दिल्ली | चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत सहित भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को सांसदों की एक समिति को सूचित किया कि लद्दाख में डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया लंबी है, लेकिन भारतीय सशस्त्र बल इसके लिए तैयार हैं। कड़ाके की सर्दियों के लिए सेना की तैनाती के सभी इंतजाम किए गए हैं। 

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच मई महीने से ही गतिरोध जारी है। जून में यह गतिरोध हिंसक झड़प में तब्दील हो गया था। 14 जून को भारत और चीनी सैनिकों के बीच टकराव हुआ, जिसमें भारत के  20 सैनिक शहीद हो गए थे, जबकि बड़ी संख्या में चीनी सैनिक भी हताहत हुए।

बैठक में भाग लेने वाले शीर्ष जनरल और थ्री-स्टार जनरलों ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी हमले का सामना करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही, चीन के साथ आए विश्वास में कमी को भी वापस लाया जा रहा है। जनरल रावत के अलावा, भारतीय सेना के उप-प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सैनी सहित कम से कम चार तीन-स्टार जनरल्स भी मौजूद थे।

हमारे सहयोगी अखबार 'हिन्दुस्तान टाइम्स' की 3 जुलाई की रिपोर्ट में बताया गया है कि गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद चीनी सेना के साथ उसी स्तर का विश्वास फिर से हासिल करना काफी मुश्किल भरा होने जा रहा है। यह डी-एस्केलेशन और डिस-एंगेजमेंट की प्रक्रिया में बाधा पहुंचा सकता है।

वहीं, चीन के साथ गतिरोध पर रक्षा मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर दस्तावेज अपलोड किए थे। इसमें कहा था कि LAC पर चीनी आक्रामकता बढ़ती जा रही है और मौजूदा गतिरोध लंबे समय तक जारी रह सकता है। मंत्रालय ने कहा कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) 17-18 मई को कुगरांग नाला, गोगरा और उत्तरी बैंक के पैंगोंग त्सो के क्षेत्रों में भारत की ओर आई। हालांकि, बाद में मंत्रालय की वेबसाइट से दस्तावेज हटा लिए गए थे।