भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर धोषणा कर दी है कि चीनी मोबाइल कंपनी वीवो आईपीएल के 13 वें सत्र के लिए प्रायोजक नहीं रहेगी। 
बीसीसीआई ने लोगों के भारी विरोध को देखते हुए वीवो से 13 वें सत्र के लिए अपना प्रायोजन करार रद्द कर दिया है। अब देखना होगा कि 13 वें सत्र के लिए प्रायोजक के लिए कौन सामने आता है। 
चीन के साथ सीमा पर जारी तनाव को देखते हुए लोगों ने चीनी सामानों का बहिष्कार करने की बात कही थी। इससे पहले आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने रविवार को हुई बैठक में वीवो को प्रायोजक के तौर पर बरकरार रखा था जिसके बाद लोगों ने बीसीसीआई का जमकर विरोध किया था।  
आईपीएल का 13वां सत्र अगले महीने 19 सितंबर से यूएई में शुरु होगा। इसका फाइनल मैच 10 नवंबर को खेला जाएगा।
वीवो इंडिया का बीसीसीआई से साल 2017 में पांच साल के लिए कारार हुआ था। इसके तहत वीवो से हर साल बीसीसीआई को 440 करोड़ रुपये की राशि मिलती है। 
वीवो का विकल्प तलाशना बीसीसीआई के सामने बड़ी चुनौती 
चीनी कंपनी वीवो के आईपीएल प्रायोजन से इंकार करने के बाद अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई के सामने बड़ी चुनौती किसी अन्य विकल्प की तलाश करना है। वीवो से बोर्ड को सालाना 440 करोड़ रुपये की राशि मिलती है। वहीं देश भर में चीनी कंपनियों को लेकर बढ़ते विरोध को देखते हुए वीवो ने मंगलवार को आईपीएल के प्रायोजन से इंकार कर दिया था। 
ऐसे में अब संयुक्त अरब अमीरात में 19 सितंबर से होने वाले आईपीएल के 13 वें सत्र के लिए बीसीसीआई को किसी नये प्रायोजक की तलाश करनी होगी क्योंकि बोर्ड को प्रायोजन करार से काफी कमाई होती है। 
वीवो के साल के 440 करोड़ रुपये के प्रायोजन का मतलब है कि बीसीसीआई को इससे 220 करोड़ रुपे की कमाई होती 220 करोड़ रुपये आठों फ्रैंचाइजी में बराबर बंटते हैं। इस प्रकार हर फ्रैंचाइजी को 28 करोड़ रुपये मिलते। कोरोना महामारी के कारण इस बार केवल कुछ ही दर्शकों को स्टेडियम में प्रवेश मिलेगा। ऐसे में अब, इस बार आईपीएल को ज्यादा गेट रेवेन्यू भी नहीं मिलेगा क्योंकि यह इवेंट सिर्फ टीवी के लिए होने वाला है। हालांकि यूएई सरकार ने पहले हफ्ते के बाद सीमित संख्या में दर्शकों को मैदान में आने की अनुमति दे दी है लेकिन फिर भी मुख्य रूप से यह इवेंट टीवी के दर्शकों के लिए ही होगा। इसका अर्थ है कि हर मैच से करीब 3 से साढ़े तीन करोड़ रुपये का नुकसान होगा। यानी हर फ्रैंचाइजी को करीब 21-24 करोड़ रुपये। इसका अर्थ है कि हर फ्रैंचाइजी को करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अंदेशा है। ऐसे में क्या बोर्ड वीवो के ही समान राशि देने वाला कोई अन्य प्रायोजक तलाश सकेगा। यह बड़ा सवाल है। कोरोना महामारी के कारण बाजार वैसे ही दबाव में हैं ऐसे में इतनी बड़ी राशि का प्रायोजक मिलना आसान नहीं होगा।