नई दिल्ली । कांग्रेस में जल्द संगठन स्तर पर बड़े फेरबदल की तैयारी है। पार्टी के कई नेता जो सालों से सचिव और प्रभारियों के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं उनमें से आधा दर्जन को महासचिव बनाकर पदोन्नति दी जानी है। इतने ही बुजुर्ग महासचिवों की छुट्टी भी होगी। वहीं, राहुल गांधी इस साल दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका में नहीं दिखेंगे। सोनिया ही अभी जिम्मेदारी निभाती रहेंगी। पार्टी के पास फिलहाल दो विकल्प हैं। वह सोनिया को कार्यकारी अध्यक्ष की जगह अध्यक्ष चुने जाने की औपचारिकता पूरी करे या चुनाव आयोग से संगठनात्मक चुनाव के लिए और समय मांगे। राहुल के करीबियों के मुताबिक, राहुल ने फिलहाल बतौर सांसद सक्रियता बनाए रखने के संकेत दिए हैं। राहुल यह जरूर चाहते हैं संगठन में जिस तरह के बदलाव अध्यक्ष रहते उन्होंने शुरू किए थे पार्टी उस दिशा में आगे बढ़े। राहुल ने अपनी मंशा कांग्रेस अध्यक्ष को बताई है। इससे साफ हो जाता है कि कांग्रेस बिहार और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव सोनिया के नेतृत्व में ही लड़ेगी।


राहुल ने शुरू की थी बदलाव की प्रक्रिया
दरअसल, राहुल ने संगठन में बदलाव शुरू किए थे, जिसमें कई महासचिव जिन पर गुटबाजी बढ़ाने और निष्क्रिय रहने के आरोप थे, उन्हें हटाया या उनसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी छीनी गई थी। कई बुजुर्ग महासचिव जिनके पास तीन-चार राज्यों का प्रभार था और वहां पार्टी कमजोर हो रही थी, वहां की जिम्मेदारी युवा नेताओं को सौंपी थी। इसी छंटनी प्रक्रिया में कांग्रेस अध्यक्ष ने कुछ महासचिवों को इशारा कर दिया है और कुछ ने खुद किनारा करने का आग्रह किया है। देश के वर्तमान माहौल में पार्टी ऐसे चेहरों को सामने लाना चाहती है, जो विषम परिस्थितियों में जमीन पर काम रहे हैं। राहुल के करीबी नेता इस बदलाव को उनकी वापसी का आधार मान रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि एक बार संगठन स्तर पर ओवरहालिंग के बाद ही दोबारा वापसी होगी।