अहमदाबाद | गुजरात हाईकोर्ट की रोक के चलते 23 जून को अहमदाबाद में रथयात्रा नहीं निकाली गई| इस घटना को लेकर शहर के वस्त्रापुर में विवादित पोस्टर लगाए गए थे| इस मामले में सीसीटीवी फूटेज के आधार पर पुलिस ने चार शख्सों को गिरफ्तार किया है और पकड़े गए चारों शख्स कांग्रेस कार्यकर्ता होने का खुलासा हुआ है| दरअसल राज्यभर में सबसे अधिक कोरोना के मामले में अहमदाबाद में दर्ज हुए हैं, जिसे देखते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने अषाढी दूज को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर रोक लगा दी थी| जिसे लेकर श्रद्धालुओं समेत साधु-संत नाराज हो गए थे| उनका कहना था कि यदि उडीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथजी की रथयात्रा निकल सकती है तो अहमदाबाद में क्यों नहीं? लेकिन कहीं कहीं राज्य सरकार के आयोजन के अभाव के कारण यह संभव नहीं हो पाया| इस घटना को लेकर शहर में कई जगह पोस्टर लगाए गए| जिसमें लिखा गया “किया विश्वासघात, माफ नहीं करेंगे जगन्नाथ”, “हिन्दू ठेकेदारों के राज में महंत मांगें मौत”, राम के नाम पर मांगे वोट जगन्नाथ के लिए मन में क्यों है खोट? ऐसे विवादित पोस्टर लगाने के आरोप में पुलिस ने सीसीटीवी फूटेज के आधार विराम देसाई समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है| पूछताछ में शख्सों ने कहा कि रथयात्रा के साथ धार्मिक भावनाएं जुड़ी है, इसलिए उन्होंने पोस्टर लगाए| पकड़े चारों लोग कांग्रेस कार्यकर्ता होने का खुलासा हुआ है| फिलहाल पुलिस चारों से पूछताछ कर रही है| गौरतलब है हाईकोर्ट से मंजूरी नहीं मिलने पर मंदिर परिसर में रथयात्रा का आयोजन किया गया था| बाद में मंदिर के महंत दिलीपदास ने आरोप लगाया था कि जिस पर उन्होंने भरोसा किया, उसी ने उनके साथ विश्वासघात किया| लेकिन भगवान को ठगने वालों को भगवान कभी माफ नहीं करेंगे| एएचपी के प्रवीण तोगडिया ने भी रथयात्रा को लेकर सरकार पर आरोप लगाए थे| विपक्ष के नेता परेश धानाणी ने राज्य सरकार पर भगवान के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया था| विवाद बढ़ने पर गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जाडेजा ने महंत दिलीपदास से मुलाकात कर मामला शांत किया| हांलाकि इस बीच रथयात्रा को लेकर शहर में कई जगह विवादित पोस्टर लगाए गए|