नई दिल्ली । पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद निजी स्कूलों में फीस वसूली का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आठ राज्यों के पेरेंट्स एसोसिएशन ने इस मामले में याचिका दायर की है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से इस मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए नियम और व्यवस्था बनाए जाने की अपील की गई है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट में इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है।
याचिका में कहा गया है कि ऑनलाइन क्लास के नाम पर स्कूल पूरी फीस वसूल रहे हैं, यह अनुचित है। इतना ही नहीं कई स्कूल तो ऑनलाइन क्लास के लिए अतिरिक्त शुल्क भी वसूल रहे हैं। इस बात की शिकायत की गई है कि कुछ प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा भी कई दूसरी चीजों की फीस ले रहे हैं, जबकि स्कूल लंबे समय से बंद हैं।
इससे पहले, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को फीस लेने की मंजूरी दे दी थी। हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि स्कूल ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस और एनुअल फीस चार्ज कर सकते हैं। लेकिन, ये फीस बढ़ाई नहीं जाएगी और पिछले साल 2019 की तरह ही चार्ज की जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिया है कि अगर फाइनेंशियल कारणों से कोई भी अभिभावक बच्चों की फीस नहीं भर पा रहा है तो उसकी दलील सुनी जाए। यदि किसी निजी स्कूल का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा है तो वह स्थानीय जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित जानकारी दें।
दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस साल स्कूलों में फीस बढ़ोतरी को रोकने वाले सरकारी प्रस्ताव पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों या अन्य बोर्डों के स्कूलों की फीस संरचना में हस्तक्षेप करने वाला आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से 8 मई को जारी सरकारी प्रस्ताव में राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों को कोविड-19 महामारी को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए फीस नहीं बढ़ाने का आदेश दिया था।