चेती चांद का खास दिन आया है और हम सिंधियों का नया साल। हम चैती चांद के बारे में जानते हैं पर हमारी आज की युवा पीढ़ी इसके बारे में ज्यादा नहीं जानती है। चेतीचांद को भगवान झूलेलाल जी के जन्मदिन के रूप में भी मनाते हैं इसलिए यह दिन हर एक सिंधी के लिए महत्वपूर्ण है । झूलेलाल साईं कौन है इनको क्यों व कैसे पूजा जाता है इन सब प्रश्नों के पीछे एक कथा है । कथा के अनुसार, सिंध प्रांत में ठट्टानगर में मिरखशाह बादशाह थे। बादशाह सभी हिंदुओं पर अत्याचार कर रहे थे व उनका धर्म परिवर्तन भी करवा रहे थे जब बादशाह ने देखा कि लोग धर्म परिवर्तन नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने ऐलान करवाया कि यदि तुमने धर्म परिवर्तन नहीं करवाया तो तुम्हें सजा-ए-मौत मिलेगी। बादशाह का यह आदेश सुनकर सभी सिंधी बहुत परेशान हो गए और वे सब मिलकर नदी किनारे गए जहां उन सब ने मिलकर जल देवता की पूजा अर्चना की और 40 दिन का उपवास किया ।लोगों की भक्ति देखकर जल देवता प्रसन्न हुए और उन्होंने आकाशवाणी की कि मैं नसरपुर में रतनलाल एवं माता देवकी के घर में जन्म लूंगा और तुम सबका उद्धार करूंगा। यह वाणी सुनकर लोग प्रसन्न हुए। ठीक 9 महीने बाद चैत्र महीने में रतन लाल जी के घर बालक ने जन्म लिया। उनके जन्म के समय एक ज्योतिषाचार्य जी ने कहा कि यह कोई साधारण बालक नहीं है यह अंधेरे में चंद्रमा की तरह उदय हुआ है। इसलिए उनका नाम उदय चंद रखा। बाद में वे भगवान झूलेलाल के नाम से प्रख्यात हुए । भगवान झूलेलाल ने बादशाह मिरखशाह से सिन्धी समाज को बचाया और हिंदू धर्म की रक्षा की, तभी से इस दिन को झूलेलाल जयंती व चेती चांद के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं । इस दिन सिंधी समाज मिलकर बहिराणा साहिब की शोभा यात्रा निकालते हैं जिसमें एक सुंदर सजा हुआ थाल होता है। उस थाल में एक पानी से भरी मटकी होती है जिसका मुँह लाल कपड़े से ढकते हैं । इसके साथ में आटे की शिवलिंग के आकार में एक पिंडी बनाते हैं जिस पर लाल रंग लगाकर लौंग, इलाइची व मिश्री से सजाते हैं व पूरे बहिराणा साहिब को गुलाब के फूलों से सजाया जाता है और एक जोत जलाई जाती है । शोभायात्रा में नौजवान छेज् लगाते हैं । छेज् एक प्रकार का नृत्य है जो डांडिया से मिलता जुलता है। प्रसाद में मीठे चावल का भोग लगाया जाता है। बहिराणा साहिब को पूरे शहर में घुमाते हुए अंत में किसी नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है। झूलेलाल साईं सभी पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें।