अमेरिका (America) दुनिया का सबसे ताकतवर देश है. मौजूदा समय में अमेरिका के पास ही सबसे ज्यादा परमाणु हथियार है. इतना ही नहीं दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर बम अमेरिका ने परमाणु बन गिराए थे. इस हमले में लाखों लोगो को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. लेकिन उस दौरा में सिर्फ अमेरिका अकेल देश नहीं था जिसके पास परमाणु हथियार थे. उस समय सोवियत संघ के पास भी परमाणु हथियार थे लेकिन सोवियत संघ ने कभी अपने परमाणु हथियारों का प्रयोग किया नहीं था. लेकिन क्या आप जानते है कि जो अमेरिका अपने परमाणु हथियारों से दुनिया को डराता है एक बार यह हथियार उसके अपने लोगों के लिए खतरा बन गए थे.

21 जनवरी 1968 को अमेरिका में एक बड़ी तबाही आ सकती थी. इसी दिन एक अमेरिकी बी -52 बमवर्षक फाइटर जेट जिसमें चार परमाणु बम थे वो ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिमी इलाके में समुद्री बर्फ पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. ग्रीनलैंड पृथ्वी पर सबसे ठंडे स्थानों में से एक है. ग्रीनलैंड डेनमार्क के राज्य का हिस्सा है और अमेरिका और डेनमार्क में काफी घनिष्ट सबंध है. सुरक्षा की दुष्टी से डेनमार्क अमेरिका के लिए काफी महत्वूर्ण है.

कहा जाता है कि यह विमान मानव गलतियों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. मीडिया रिपोर्ट में इस विमान दुर्घटना के बारे में कहा गया है कि चालक दल के सदस्यों में से एक ने हीटिंग वेंट के सामने कुछ सीट कुशन लगाए थे जिसमें बाद में आग लग गई थी. धुआं जल्दी इतना गाढ़ा हो गया कि चालक दल को बाहर निकालने की जरूरत पड़ी.

कहा जाता है कि विमान में चार परमाणु बम थे जिसमें से दो मार्क 39 परमाणु बम बर्फ पर गिर गए थे जिसमें से एक में डिटोनेशन की प्रकिया शुरू हो गई थी. लेकिन परमाणु बम किसी कारण फटा नहीं था. कहा जाता है कि एक कम वोल्टेज का स्विच नाकाम हो गया था.