भोपाल।  मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि बांस उद्योग को प्रोत्साहित कर इसके माध्यम से रोजगार उपलब्ध करवाने के‍ लिए बिगड़े वन क्षेत्र, पड़त भूमि तथा किसानों के खेतों में बांस उत्पादन के लिए समयबद्ध कार्य-योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में बांस मिशन की बैठक में यह निर्देश दिए। वन मंत्री उमंग सिंघार बैठक में उपस्थित थे। 
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि बिगड़े हुए वन क्षेत्रों में और राजस्व की पड़त भूमि पर बांस उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग निजी क्षेत्र में किसानों की सहभागिता से बांस उत्पादन के लिए प्रस्तावित कार्य क्षेत्र की योजना बनाएं और उसके क्रियान्वयन की समय सीमा तय की जाए।
कमल नाथ ने कहा कि बांस उद्योग में रोजगार की बड़ी संभावना है। इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा सकते हैं। कमल नाथ ने कहा कि किसानों को भी अपने खेतों में बांस उत्पादन के लिए प्रेरित करना चाहिए और उसके लिए उन्हें हर संभव सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने बांस उद्योगों की कठिनाईयों को दूर करने के लिए संबंधित विभागों में आपसी तालमेल बनाने को कहा।
बांस उद्योग से जुड़े उद्योगों के प्रतिनिधियों ने बैठक में बताया कि बांस उत्पादन से जहाँ एक ओर बांस आधारित उद्योगों को बल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। प्राकृतिक वनों पर पड़ने वाला दबाव कम होगा। जलवायु परिवर्तन की गति कम करने में सहायता मिलेगी। प्रदेश में बांस को अगरबत्ती, चारकोल, पार्टीकल बोर्ड के निर्माण में तथा कोयले के विकल्प के रूप में ईंधन की तरह उपयोग करने के क्षेत्र में उद्योगों के स्थापना की संभावना है। 
बैठक में अपर मुख्य सचिव वन ए.पी. श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ. यू. प्रकाशम, मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश बांस मिशन डॉ. अभय कुमार पाटील एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय कुमार शुक्ला एवं बांस उद्योग से जुड़े डालमिया भारत ग्रुप के महेन्द्र सिंह, आर्टिशन एग्रोटेक के देवोपम मुखर्जी, सुभाष भाटिया एवं अश्विनी पाहुजा उपस्थित थे।