नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि वह केंद्र की दलीलों को सुने बगैर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) पर रोक नहीं लगाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए अपना जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। सरकार के लिए राहत की बात यह है कि अधिवक्ता कपिल सिब्बल की ओर से सीएए पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने की मांग को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि अभी हम कोई अंतरिम आदेश नहीं देंगे, सरकार के जवाब के बाद ही इस मामले में आदेश दिया जाएगा। कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। पीठ ने यह भी साफ कर दिया कि सीएए पर असम के मामले में अलग से कोई भी सुनवाई नहीं की जाएगी। अदालत केवल 144 याचिकाओं पर ही विचार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वह वृहद संविधान पीठ के पास भेज सकता है। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीएए की वैधता को चुनौती देने वाली 143 याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और कांग्रेस नेता जयराम रमेश की याचिकाएं भी शामिल हैं। केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि 143 याचिकाओं में से करीब 60 की प्रतियां सरकार को दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली उन याचिकाओं पर जवाब देने के लिए सरकार को समय चाहिए, जो उसे अभी नहीं मिल पाया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से सीएए के क्रियान्वयन पर रोक लगाने और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की कवायद फिलहाल टाल देने का अनुरोध किया। न्यायालय ने कहा वह इस मामले पर केंद्र को सुने बगैर सीएए पर कोई रोक नहीं लगाएगा। सीएए में 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी समुदायों के शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है।राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी जिससे उसने कानून की शक्ल ले ली। आईयूएमएल ने अपनी याचिका में कहा कि सीएए बराबरी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और इसका मकसद धर्म के आधार पर लोगों को बाहर कर अवैध शरणार्थियों के एक वर्ग को नागरिकता देना है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों पर कठोर हमला है। राजद नेता मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की हैं। कई अन्य याचिकाकर्ताओं में मुस्लिम संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू), पीस पार्टी, भाकपा, एनजीओ ‘रिहाई मंच’ और सिटिजंस एगेंस्ट हेट, वकील एम एल शर्मा और कानून के छात्र शामिल हैं।