नई दिल्ली,सरकार एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में डिविडेंड को इनकम में जोड़ने की घोषणा कर सकती है। इसका मतलब होगा कि डिविडेंड को कुल इनकम का हिस्सा माना जा सकता है। इसके एवज में सरकार कंपनियों को राहत देते हुए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) को पूरी तरह से समाप्त कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस बार के बजट में शेयर मार्केट से जुड़े कई अहम फैसलों की घोषणा हो सकती है। इनमें डीडीटी को हटाना शामिल हो सकता है। अभी डिविडेंड पर टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी कंपनी पर होती है। डिविडेंड पर 20.55 फीसदी डीडीटी लगता है, इसमें सरचार्ज और एजुकेशन सेस शामिल होता है।  
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार शेयरधारकों को मिलने वाले डिविडेंड को उनकी आमदनी से जोड़ सकती है। हालांकि इसमें 20 फीसदी का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी को एक लाख रुपये का डिविडेंड मिला है तो उसे 20 फीसदी स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा। बाकी के 80,000 रुपये उसकी आदमनी में जोड़े जाएंगे जिस पर इनकम टैक्स देना हेगा।

बजट बनाने की प्रक्रिया में वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और सरकार के अन्य मंत्रालय शामिल होते हैं। वित्त मंत्रालय हर साल खर्च के आधार पर गाइडलाइन जारी करता है। इसके बाद मंत्रालयों को अपनी-अपनी मांग को बताना होता है। आइए जानते हैं आखिर कैसे बनता है देश का बजट।
लंबे समय से होती है तैयारी
लंबे समय से इसकी तैयारी होती है। हजारों लोग दिन-रात एक करके पूरा हिसाब-किताब लगाते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार, केंद्रीय बजट किसी वर्ष सरकार की अनुमानित आमदनी और खर्च का लेखा-जोखा होता है।
ली जाती है सबकी राय
आम बजट बनाने की प्रक्रिया में सहभागिता बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय पिछले कई सालों से नागरिकों से सुझाव मांगता है। वित्त मंत्रालय उद्योग से जुड़े संगठनों और पक्षों से भी सुझाव मांगता है।
कौन बनाता है बजट?
बजट बनाने की प्रक्रिया में वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और सरकार के अन्य मंत्रालय शामिल होते हैं। वित्त मंत्रालय हर साल खर्च के आधार पर गाइडलाइन जारी करता है। इसके बाद मंत्रालयों को अपनी-अपनी मांग को बताना होता है।
इस तरह दिया जाता है अंतिम रूप
बजट के सभी डॉक्युमेंट्स चुनिंदा अधिकारी ही तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सभी कंप्यूटर्स को दूसरे नेटवर्क से डीलिंक कर दिया जाता है। बजट पर काम कर रहा लगभग 100 लोगों का स्टाफ करीब 2 से 3 हफ्ते नॉर्थ ब्लॉक ऑफिस में ही रहता है। कुछ दिन उनको बाहर आने की इजाजत नहीं होती।
फिर होता है संसद में पेश
बजट पेश करने की तारीख पर सरकार लोकसभा स्पीकर की सहमति लेती है। इसके बाद लोकसभा सचिवालय के महासचिव राष्ट्रपति से मंजूरी लेते हैं। वित्त मंत्री लोकसभा में बजट पेश करते हैं। बजट पेश करने से ठीक पहले 'समरी फॉर द कैबिनेट' के जरिए बजट के प्रस्तावों पर कैबिनेट को संक्षेप में बताया जाता है। वित्त मंत्री के भाषण के बाद सदन के पटल पर बजट रखा जाता है।

टैक्स एक्सपर्ट सुशील अग्रवाल का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो यह एक अच्छी स्थिति होगी। इससे सरकार को फायदा होगा और शेयरधारकों को अधिक डिविडेंड मिलेगा। डीडीटी लगने के कारण कंपनियों को पहले ही कुल राशि का 20 फीसदी टैक्स के तौर पर रखना पड़ता था। अगर डीडीटी हट गया तो वे पूरी राशि को डिविडेंड के तौर पर दे सकेंगी। इससे शेयरधारकों को पहले की तुलना में अधिक डिविडेंड मिलेगा। यह उनकी आदमनी में जुड़ जाएगा, लेकिन इसका असर निचले टैक्स स्लैब में आने वालों पर ज्यादा नहीं होगा। इनकम टैक्स के 30 फीसदी स्लैब में आने वालों को इससे कुछ नुकसान होगा।