सदाचार एक व्यापक और सार्वभौम तत्व है। देशकाल की सीमाएं इसे न तो विभक्त कर सकती हैं और न इसकी मौलिकता को नकार सकती हैं।  जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश सबके लिए होता है, उसी प्रकार सदाचार के मूलभूत तत्व मानव मात्र के लिए उपयोगी होते हैं। कुछ व्यक्ति अपने राष्ट्र, कुल या परंपरागत आचार को विशेष महत्व देते हैं, किंतु यह अपनेपन का व्यामोह है। जो कुछ मैं कर रहा हूं, वह सदाचार है, इस धारणा की अपेक्षा व्यक्ति को ऐसी धारणा सुदृढ़ करनी चाहिए कि जो सत् आचरण है, वह मेरे लिए करणीय है।   सदाचारी व्यक्ति नीतिनि… होता है। वह किसी भी स्थिति में नीति के अतिप्रमण को अपनी स्वीकृति नहीं दे सकता। नीतिनिष्ठ व्यक्ति को परिभाषित करते हुए कहा गया है- जिस व्यक्ति में अभय, मृदुता, सत्य, सरलता, करुणा, धैर्य, कर्तव्यनिष्ठ और व्यक्तिगत संग्रह का संयम और प्रामाणिकता होती है, वह नीतिमान कहलाता है। जो व्यक्ति सत्य के प्रति समर्पित होता है, अन्याय का प्रतिकार करते समय भयभीत नहीं होता, अपनी भूल ज्ञात होने पर उसे स्वीकार करने में संकोच नहीं करता और कठिनतम परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार रहता है, वह अभय का साधक होता है।   
कोमलता का नाम मृदुता है। यह सामूहिक जीवन की सफलता का सूत्र है। इसके द्वारा व्यक्ति के जीवन में सरसता आती है। मृदु स्वभाव में लोच होती है, इस स्वभाव वाला व्यक्ति किसी भी वातावरण को अपने अनुकूल बना लेता है। सत्य का अर्थ है यथार्थता। जो तथ्य जैसा है उसे वैसा ही जानना, मानना, स्वीकार करना और निभाना सत्य है। सत्य की साधना कठिन अवश्य है, पर है आत्मतोष देने वाली। आर्जव सरलता का पर्यायवाची शब्द है। सरलता सदाचार की आधारभूमि है। इसी उर्वरा में सदाचार की पौध फलती-फूलती है। मायावी व्यक्ति कभी सदाचारी नहीं हो सकता। करुणा सदाचार का मूल है। जिस व्यक्ति के अंत:करण में करुणा नहीं होती, वह अहिंसा के सिद्धांत को समझ नहीं सकता। अहिंसा के बिना समता का विकास नहीं होता।