नई दिल्ली: देशभर में मालवाहक रेलगाड़ियां अगले कुछ दिनों में बिना किसी रुकावट के अलग गलियारे में तेज गति से दौड़ पाएंगी. खास बात यह है कि यह मालगाड़ियां अभी तक ट्रैकों पर दौड़ रहीं मालगाड़ियों से ढाई गुना अधिक क्षमतावान होंगी, क्‍योंकि इनकी लंबाई करीब 1500 मीटर तक होगी. इससे एक मालवाहक रेलगाड़ी में एक बार में करीब 13 हजार टन तक सामान ढोया जा सकेगा. इस तरह एक मालगाड़ी करीब 1300 ट्रकों का सामान तेेेज गति से पहुंचा सकेगी. ऐसा संभव होने जा रहा है भारतीय रेल (Indian Railways) के डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर (DFCCIL) द्वारा मालवाहक रेलगाड़ियों के लिए बनाए जा रहे अलग गलियारों और सिगनल, विद्युतीकरण एवं ट्रैक की नई तकनीक के प्रयोग की वजह से. 

खुर्जा-भदान सेक्‍शन संभवत: 2 अक्‍टूबर से ऑपरेशनल हो जाएगा
दरअसल, मालगाड़ियों के लिए अलग से बनाए जा रहे रेल गलियारों में पूर्वी गलियारे का उत्तर प्रदेश स्थित खुर्जा-भदान सेक्‍शन संभवत: आगामी 2 अक्‍टूबर से ऑपरेशनल हो जाएगा. इस 194 किलोमीटर के सेक्‍शन पर मालगाड़ियों का परिचालन शुरू हो जाएगा. 

औसत 65 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी मालगाड़ियां
खुर्जा-भदान सेक्‍शन पर मालगाड़ियों का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के बाद करीब 15 मालगाड़ियों को इस पर चलाया जाएगा. इससे दिल्‍ली-NCR में आने वाली गाड़ियों की समयबद्धता पर अच्छा असर पड़ेगा. इस सेक्‍शन पर मालगाड़ियों की औसत गति 65 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी, जोकि अभी तक सामान्‍य रूप से 40 से 50 kmph तक रहती है.

विश्व की दूसरी सबसे बड़ी वीडियो वॉल बनाई गई
खास बात यह भी है कि DFCCIL के पूर्वी कॉरिडोर (Eastern Corridor) पर गाड़ियों के परिचालन को नियंत्रित करने के लिए प्रयागराज में एक ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर बनाया गया है, जिसमें विश्व की दूसरी सबसे बड़ी वीडियो वॉल बनाई गई है. 
एक बार में लगभग 13 हजार टन सामान जा सकेंगी मालगाड़ियां
डीएफसी पर सिगनल, विद्युतीकरण एवं ट्रैक की नई तकनीक का प्रयोग किया गया है. इसकी मदद से एक दिन में 120 हैवी हॉल मालगाड़ियां एक दिशा में चलाई जा सकेंगी. एक हैवी हॉल मालगाड़ी में करीब 105 वैगन होते हैं. अभी तक मालगाड़ियों के अलग-अलग तरह के वैगंस में अधिकतम 40 से 58 वैगन ही शामिल रहते थे, जबकि अब मालगाड़ी की लंबाई 1500 मीटर तक हो जाने से इसमें लगभग 105 के आसपास वैगन शामिल होंगे. इससे भारतीय रेलवे मालढुलाई के लिहाज से एक नया मुकाम भी हासिल कर सकेगी. बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी इस गाड़ी में लगभग 13 हजार टन सामान ले जाया सकेगा. इस तरह एक मालगाड़ी करीब 1300 ट्रकों का सामान बेहद तेज गति से पहुंचाया जा सकेगा. इनमें रो-रो सेवा भी शामिल होगी. साथ ही डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) पर सीमेंट की ढुलाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. 

35 करोड़ टन कार्बन डाइ ऑक्साइड का उर्त्सजन कम होगा
वर्ल्‍ड बैंक के एक अध्ययन के मुताबिक, डीएफसी के पूरी तरह से शुरू होने के बाद अगले 30 साल में 35 करोड़ टन कार्बन डाइ ऑक्साइड का उर्त्सजन कम होगा. इसके मद्देनजर ही  DFCCIL के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान ने डीएफसी के अधीन हैवी हॉल अनुसंधान संस्थान के साथ शोध एवं विकास पहल के तहत ऑस्ट्रेलिया के वॉलोन्गॉन्ग विश्वविद्यालय के साथ सहयोग के एक करार पर हस्ताक्षर भी किए हैं.