नई दिल्ली । देश में काफी विस्तार कर चुकी रिलायंस इंडस्ट्रीज अब विदेश में अपनी गतिविधियां बढ़ाना चाहती है। कंपनी की नजर अब फैशन, स्पोर्ट्स और बच्चों से जुड़ी विदेशी रिटेल चेन खरीदने पर लग गई है। कंपनी कंज्यूमर बाजार में विस्तार के लिए कई ग्लोबल स्पोर्ट्स और ब्यूटी ब्रांड से साझेदारी भी कर सकती है। एशिया के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज अब पेट्रोलियम के अपने कोर कारोबार से अलग कंज्यूमर गुड्स कंपनी बनती जा रही है। कंपनी अब हैंडबैग से लेकर ब्रॉडबैंड तक सबकुछ बेच रही है, ताकि देश के मध्यम वर्ग की बचत का बड़ा हिस्सा अपने पाले में किया जा सके। रिलायंस पहले से ही देश में कई हाई एंड स्टोर्स चला रही है, जिनमें ब्रिटिश लेबल बर्बेरी, जूता कंपनी स्टीव मैडेन, न्यूयॉर्क के आईकोनिक्स ब्रैंड ग्रुप इंक जैसे 40 विदेशी साझेदारों के उत्पाद मिलते हैं। इसी साल मई माह में रिलायंस ने दुनिया की सबसे पुरानी खिलौना कंपनी हैमलीज को 8.85 करोड़ डॉलर में खरीदकर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण किया है।
गौरतलब है कि आय और स्टोर्स की संख्या के लिहाज से रिलायंस देश की सबसे बड़ी रिटेल चेन बन गई है। मुकेश अंबानी अपने ग्रॉसरी और होलसेल कारोबार को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। रिलायंस ब्रैंड के उत्पाद देश के 788 स्थानों पर उपलब्ध हैं, जो एक्सक्लूसिव ब्रैंड आउटलेट, शॉपिंग मॉल और एयरपोर्ट जैसी जगहों पर भी है। कंपनी मार्च 2020 के वित्त वर्ष में देश में 120 नए स्टोर खोलने की तैयारी कर रही है। कंपनी अब ब्यूटी और एथलेटिक लाइफस्टाइल वियर में उतरने की तैयारी कर रही है और इसके लिए साझेदार तलाश रही है। कंपनी मल्टी ब्रैंड स्पोर्ट्स, वेलनेस और फिटनेस कारोबार में भी रुचि रखती है। वीमेन्स और मेन्स ब्यूटी प्रोडक्ट कारोबार में भी कंपनी जगह बनाना चाहती है। रिलायंस का टारगेट देश का करीब पांच करोड़ संपन्न वर्ग है। कंपनी की सालाना रिपोर्ट के अनुसार,  वित्त वर्ष 2018-19 में रिलायंस का कंसोलिडेटेड टर्नओवर 6,22,809 करोड़ रुपए का रहा, जो एक साल पहले के मुकाबले 44 फीसदी ज्यादा है। इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा 39,588 करोड़ रुपये का रहा, जिसमें पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 13.1 फीसदी की बढ़त हुई है। हाल में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटल) फिर 8 लाख करोड़ रुपए के पार हो गया है।