बच्चे की याददाश्त बचपन से ही तेज कैसे रखी जाए। यह बात सभी अभिभाव सोचते हैं। इसके लिए अधिकतर लोग बेहतर खानपान पर जोर देते हैं पर इतना ही काफी नहीं है।  याददाश्त बढ़ाने के लिए आपको बच्चे के साथ कुछ छोटी-छोटी दिमागी कसरतें भी करनी होगीं। 
मान लीजिये अगर आप कहीं घूमने गये हैं और वहां किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने गए तो लौटकर उससे जुड़े सवाल करें। घर लौटने के बाद आप बच्चे से रेस्टोरेंट से जुड़ी कुछ बातें पूछिए। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि आप जो सवाल बच्चों से पूछें उनके जवाब आपको भी याद हों। जैसे रेस्टोरेंट में आप किस और बैठे थे वहां किस रंग की फोटो लगी थी या उससे जुड़े कोई खास सवाल। ध्यान रहे ये जवाब आप को भी आने चाहिये। 
लेफ्ट-राइट एक्सरसाइज याददाश्त बढ़ाने का बेहद खास तरीका है। इसमें बच्चे के सामने कई सारे खिलौने रखे होते हैं और उन्हें उन खिलौनों को दाईं या बाईं ओर रखने के लिए कहा जाता है। उदाहरण के लिए बच्चे को कुछ गेंदें दीजिए और उन्हें दाईं ओर रखी टोकरी में रखने के लिए कहिए। दूसरे दिन भी उसे गेंद को वहीं रखने के लिए कहिए, पर तीसरे दिन गेंदों को बाईं ओर रखने के लिए कह दीजिए। बच्चे का हाथ पहले दाईं ओर ही बढ़ेगा। पर, लगातार इस तरह के एक्सरसाइज से उसकी मानसिक सतर्कता और याददाश्त मजबूत होगी।’
जैसा कि आप जानती ही हैं कि इंग्लिश भाषा में दो तरह के अक्षर होते हैं, स्वर और व्यंजन। अब पढ़ाई के बाद आपको बच्चे के साथ इन्हीं वॉवेल से जुड़ा खेल खेलना है। कागज पर एक बॉक्स बनाएं और उसमें अंग्रेजी के कुछ अक्षर लिखें। बच्चे से उन शब्दों को काटने के लिए कहें, जिसमें वॉवेल न हों। इस तरह से बच्चे की अंग्रेजी तो अच्छी होगी ही, उसकी दिमागी एक्सरसाइज भी होगी।
घर के कामों में लगाएं 
किचेन में काम करते हुए बच्चे को भी काम में शामिल कीजिए। उन्हें कुकिंग से जुड़े छोटे-छोटे काम करने के लिए बोलें ताकि वो जान जाएं कि कौन-सी चीज कहां रखी है? अब अगले दिन उन्हें फिर से वही चीजें आपको रसोई से लाकर देने के लिए कहें। इससे होगा यह कि आपको पता चलेगा कि चीजें कहां रखी हैं, बच्चे को यह याद भी है या नहीं। जैसे आप बच्चे से प्याज लाने के लिए बोलिए। अगले दिन जब वो फिर यही काम करेगा तो दिमाग पर जोर डालेगा कि मां ने प्याज कहां रखे थे। 
नंबर गेम का कमाल
डिजिट स्पैन मतलब वो एक्सरसाइज जो बच्चे की याददाश्त बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। इसके लिए बच्चे के सामने कुछ अंक बोलिए और उन्हें याद करने के लिए कहिए। अगले दिन बच्चे को आपको वो सारे अंक बताने होंगे। इसके लिए फोन नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है। आप कोई ऐसा नंबर बच्चे के सामने बोलिए जो उसे याद कराना ही हो। अब अगले कुछ दिनों तक बच्चे से वह नंबर नियमित रूप से पूछती रहें। खेल-खेल में उसकी याददाश्त बढ़ेगी।’ 
इस एक्सरसाइज में बच्चा बेडरूम में ही कहीं भी अपना पसंदीदा खिलौना रख कर आएगा और दूसरे दिन उसे वहां से लेकर भी आएगा। वो भूल ना पाए, इसके लिए आपको संकेत देते रहने होंगे। बच्चे से कहिए कि वो बेडरूम की किसी खास ड्राअर में अपना खिलौना रखे। कुछ देर बाद या दूसरे दिन उससे वही खिलौना लाने के लिए बोलें। इस तरह से वो जब भी अपना सामान कहीं रखेगा तो जगह याद रखेगा। दोबारा उसे वो जगह सोचनी नहीं पड़ेगी।’