बालाघाट में एक बेटे को अपनी मां (mother) से इतना प्रेम है कि उसने उसके पैरों में जंजीर बांध (woman tied with chain) दी है ताकि वह उसे छोड़कर और कहीं नहीं जा पाए. चौकिए मत, बेटे को अपनी मां के साथ ऐसा व्यवहार इसलिए करना पड़ा है, क्योंकि, उसकी मां मानसिक रूप से बीमार (mental illness) है. मानसिक तौर पर बीमार रहने के कारण महिला परिवार के सदस्यों को बिना बताए कहीं दूर चली जाती है. ऐसे में परिवार के लोग उसे ढूंढ़ते - ढूंढ़ते परेशान हो जाते हैं. इसीलिए लाचार होकर बेटे (helpless son) को ऐसा बेरहम कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा. बता दें कि इस बात का पता तब चला जब गत मंगलवार को बालाघाट के लांजी थाने में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी पुलिस नितेश भार्गव (police officer) की नजर इस महिला पर पड़ी. तब बुजुर्ग महिला (elderly lady) रास्ते में झुककर चल रही थी. जब नितेश को कारण का पता चला तब उन्होंने महिला को पैरों की जंजीर से मुक्त कर दिया.

बीमार मां की मानसिक हालत देखकर डर गया बेटा

मिली जानकारी के अनुसार देवरबेली पुलिस चौकी (devarbelly police chauki) के तहत ग्राम बेलगांव (belgaon) निवासी 65 वर्षीय कैतिनबाई को एक पुत्र विनोद है जिसकी शादी हो चुकी है. कैतिनबाई के पति का स्वर्गवास हो चुका है. इस महिला को एक नाती और एक नातिन भी है. विनोद और उसकी पत्नी दैनिक मजदूरी (wage earner) कर अपनी मां और परिवार का पालन-पोषण करते हैं. दुर्भाग्य से विनोद की मां पिछले कुछ वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने लगी है. बीमार महिला इस अवस्था में घर से बाहर कहीं भी दूर चली जाया करती है. ऐसी घटनाएं रोज होने से परिवार के सदस्य बहुत परेशान हो गए. बेटे को इस बात का भय सताने लगा कि कहीं उसकी मां इसी तरह कोई दिन गायब न हो जाए, वह अपनी मां को खो न दे.

इसके लिए बेटे ने तय कर लिया कि जब वह और उसकी पत्नी सुबह काम पर जाएंगे तब वे मां के पैरों में जंजीर बांध दिया करेंगे ताकि वह घर से बाहर नहीं जा सके और सुरक्षित रहे. ऐसा कदम उठाने के बाद से बेटा-बहू नश्चिंत हो गए. काम पर से शाम में घर लौटने पर बेटा मां के पैरों की जंजीर खोल दिया करता है. गांव वालों के अनुसार यह सिलसिला पिछले तीन सा से चल रहा है.

आसपास के लोगों का कहना है कि वृद्ध महिला के बेटा-बहू उसकी उचित देखभाल किया करते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल से अपनी मां की सुरक्षा के लिए बेटा-बहू ऐसा कर रहे हैं. जब लांजी के नुभागीय अधिकारी को महिला के खराब मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी हुई तब उन्होंने उनका इलाज कराने का आश्वासन दिया.