महिलाओं में स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस बीमारी के प्रति जागरुकता पर जोर दिया गया है। शुरुआती स्तर पर पता चलने पर ये लाइलाज नहीं होता। स्तन कैंसर के बेहतर इलाज की संभावनाएं तलाश रहे वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की सहायता से इसके पांच नए प्रकारों की पहचान की है। इस खोज से स्तन कैंसर के इलाज को और सटीक बनाना संभव होगा। 
शोधकर्ताओं ने पाया कि इम्यूनोथेरेपी के लिए दो प्रकार का कैंसर अन्य के मुकाबले ज्यादा प्रतिक्रिया देते हैं, जबकि एक में टैमोक्सिफेन पर निर्भर होने की अधिक संभावना थी। शोधकर्ता अब इस प्रकार के स्तन कैंसर के लिए ऐसे टेस्ट विकसित कर रहे हैं जिसका उपयोग व्यक्तिगत परीक्षणों को उपचार का एक मानक हिस्सा बनाने के लिए किया जाएगा। साथ ही क्लीनिकल ट्रायल में विभिन्न दवाओं के लिए रोगियों का चयन करने के लिए किया जाएगा।
इलाज के नए रास्ते मिलेंगे 
इस अध्ययन की मदद से स्तन कैंसर के इलाज के नए रास्ते तो खुलेंगे ही साथ ही नई दवाओं के लक्ष्यों की पहचान में भी आसानी से हो पाएगी। एआइ में ऐसी क्षमता है कि इसका बड़े स्तर पर उपयोग किया जा सकता है और इस तकनीक को सभी कैंसर में लागू करने के प्रसास हो रहे हैं। इससे कैंसर के उपचार की नई संभावनाओं की राह भी खुल सकती है।’
स्तन कैंसर के प्रकार
इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा- स्तन कैंसर का ये रूप मिल्क डक्ट्स में विकसित होता है। इतना ही नहीं महिलाओं में होने वाला स्तन कैंसर 75 फीसदी इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा ही होता है। इस प्रकार का कैंसर डक्ट वॉल से होते हुए स्तन के चर्बी वाले हिस्से में फैल जाता है।
इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमा- ये स्तन कैंसर बहुत ही कम देखने को मिलता है। यानी 1 फीसदी भी इस प्रकार का कैंसर नहीं होता। दरसअल इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमा का उपचार बहुत मुश्किल होता है। इतना ही नहीं स्तन कैंसर का ये रूप शरीर में तेजी से फैलता है। जिससे महिलाओं की मौत का जोखिम भी बना रहता है।
पेजेट्स डिज़ीज़- इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमा की ही तरह पेजेट्स डिजीज भी लगभग 1 फीसदी ही महिलाओं में पाया जाता है। ये निप्पल के आसपास से शुरू होता है और इससे निप्पल के आसपास रक्त जमा हो जाता है जिससे निप्पल और उसके चारों और का हिस्सा काला पड़ने लगता है। स्तन कैंसर का ये प्रकार भी इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा की तरह निप्पल के मिल्क प्रोडक्ट्स से शुरू होता है। इस प्रकार का स्तन कैंसर आमतौर पर उन महिलाओं को होता है जिन्हें स्तन से संबंधित समस्याएं होने लगे। जैसे- निप्पल क्रस्टिंग, ईचिंग होना, स्तनों में दर्द या फिर कोई संक्रमण होना।
स्तन कैंसर के कारण
स्तन कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 वर्ष की उम्र के बाद इसके होने की आशंका बढ़ जाती है।
उम्रदराज महिला की पहली डिलीवरी के कारण स्तन कैंसर की संभावना बढ़ जाती हैं।
गर्भ निरोधक गोली का सेवन और हार्मोंन की गड़बड़ी इसका अन्य कारण माना जाता हैं।
वंशानुगत कारणों से भी इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है।
स्तन कैंसर के लक्षण
स्‍तन या निपल के साइज में असामान्य बदलाव।
कहीं कोई गांठ जिसमें अक्सर दर्द न रहता हो, स्‍तन कैंसर में शुरुआत में आम तौर पर गांठ में दर्द नहीं होता।
त्‍वचा में सूजन, लाली, खिंचाव या गड्ढे पड़ना।
एक स्‍तन पर खून की नलियां ज्यादा साफ दिखना।
निपल भीतर को खिंचना या उसमें से दूध के अलावा कोई भी लिक्विड निकलना।
स्‍तन में कहीं भी लगातार दर्द।