आर्टिकल 370 खत्म होने पर पंडिता परिवार को उम्मीद जगी है कि वे फिर से वापस कश्मीर जा सकेंगे और बेटों को संपति दे सकेंगे I कश्मीरी पंडित पीएल राज़दान मोनिका के पिता की आंखों ने सिर्फ़ दर्द, मौत, खून-खराबा और विस्थापन देखा हैIउन्होंने कभी सोचा न था कि ये बूढ़ी आंखें ये दिन भी देख पाएंगीI राज़दान को साल 1990 की 19 जनवरी को अपना सब कुछ छोड़कर कश्मीर से भागकर जम्मू में शरण लेनी पड़ी थीI पीएल बताते हैं, "उस रात को मस्जिदों से 'यत बनावो पाकिस्तान...' के नारे गूंजेI वो आज भी उस काली रात को याद कर सिहर उठते हैं, जब 19 जनवरी की वो शाम याद आती है. उस वक़्त वो अपने घर मे मौजूद थेI जब मस्जिदों से आवाज़ें सुनाई दीं तो टांगे थर्रा गईंI

जब हर ओर से ये ख़बरें आने लगीं कि कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर जाना होगा तो उनके दिल में सबसे पहले ये ख्याल आया कि मेरे घरवाले कहां जाएंगे, क्या खाएंगे और घरों का क्या होगाI अपनी बेटियों को 22 घंटे एक स्टोर रूम में छिपाकर रखा थाI यहां तक कि चूहे मारने की दवा खोजी की अगर कुछ हुआ तो पूरा परिवार जहर खा लेगाI

30 साल पहले हुई घटना की टीस अब भी पंडिता परिवार के दिलोदिमाग में हैI परिवार कहता है तब से कितनी सरकारें आईं और गईंI किसी ने कश्मीरी पंडितों का दर्द नहीं समझाI मोदी सरकार ने कश्मीरी हिंदुओं के दर्द को अपना मानकर न्याय दिलाया हैI कश्मीर में पंडिता परिवार के कुछ संपत्ति है वो अब उस संपति पर अपना घर बनाना चाहते है और कश्मीर की संपति काम से कम अपने बच्चों के नाम कर सकेंगेI