पटना: लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त खा चुके महागठबंधन के दलों को अब खुद पर विश्वास नहीं हो रहा है. चुनाव नतीजे आने के बाद से ही जदयू को एनडीए से अलग होने की सलाह महागठबंधन के दल दे रहे हैं और कह रहे है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) सिद्धांतों की राजनीति करने वाले हैं, वह समझौता नहीं करेंगे और समाजवादी धारा की राजनीति को मजबूत करने के लिए एनडीए से अलग हो जायेंगे. हालांकि जदयू के नेता इसे महागठबंधन के नेताओं की कोरी कल्पना बता रहे हैं और कह रहे हैं कि 2019 की तरह एनडीए 2020 के विधानसभा चुनाव में भी प्रदर्शन करेगा. विपक्षियों को फिर सुपड़ा साफ होगा.

अलग-अलग बयान दे रहे जदयू नेता
संसद से जिस तरह से जदयू के विरोध के बाद भी ट्रिपक तलाक, धारा 370 और 35ए पास हुये हैं. उसको लेकर राजनीति तेज है. इस मुद्दे पर जदयू अभी दो धाराओं में बंटी दिखती है. हालांकि पार्टी में नंबर दो के नेता माने जा रहे आरसीपी सिंह (RCP Singh) का कहना है कि देश में दो कानून बन जाता है, उसका पालन करना सभी का कर्तव्य है. आरसीपी की तरह ही पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक की सोच इससे अलग है. उनका कहना है कि भले ही कोई कानून बन गया है, लेकिन लोकतंत्र में कानून का भी विरोध होता है. उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर देश को रसातल में ले जाने का आरोप भी लगाया. जदयू नेताओं की अलग राय ने विपक्ष को फिर से मौका दे दिया है और वह कह रहे हैं कि जदयू समाजवादी सोच की पार्टी है, वह ज्यादा दिनों तक भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी के साथ नहीं रह सकती है.

जदयू के बिना बिहार में सत्ता सुख नहीं
अगर हम जदयू की बात करें, तो बिहार में एक ऐसा ध्रुव बन चुकी है, जिसके बिना किसी भी दल का सत्ता में आना मुमकिन नहीं लगता है. 2015 में जदयू ने राजद का साथ दिया था, तो पार्टी 10 सालों के बाद सत्ता में लौट पायी थी, लेकिन दो साल के अंतर पर ही गठबंधन टूट गया और जदयू ने भाजपा के साथ हाथ मिलाया और फिर से दोनों सत्ता में आ गये. 


2019 के चुनाव का नतीजा जिस तरह का आया है, उससे विपक्ष के नेता हताश हैं, क्योंकि 40 में से 39 सीटें एनडीए के खाते में गयी हैं. ऐसे में विपक्षी नेताओं को लगता है कि अगर वह किसी तरह से जदयू को अपने पक्ष में करने में कामयाब हो गये, तो सत्ता में उनकी वापस हो सकती है. यही वजह है कि विपक्ष की ओर से लगभग हर मौके पर जदयू को भाजपा से गठबंधन तोड़ने का ऑफर दिया जा रहा है.

विपक्षी दल CM नीतीश पर डाल रहे डोरे
विपक्षी दलों ने रणनीति के तहत मानसून सत्र के दौरान जदयू के खिलाफ हमला सॉफ्ट रखा. उनके निशाने पर भाजपा नेता और डिप्टी सीएम सुशील मोदी और केंद्र की भाजपा सरकार रही. हर मौके पर जदयू का विपक्ष साथ देता नजर आया. कई मौकों पर जदयू की मुश्किल विपक्ष ने आसान की. बिहार में आयी बाढ़ में केंद्रीय मदद का मुद्दा भी विपक्ष की ओर से उठाया गया और उसी के बहाने भाजपा पर वार किया गया. अब धारा 370 और ट्रिपल तलाक के मुद्दे ने विपक्ष को फिर से मौका दे दिया है. वो जदयू को समाजावादी विचारधारा की दुहाई दे रहा है और कह रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) को एनडीए से बाहर आना चाहिये और महागठबंधन का नेतृत्व कर समाजवादी धारा की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहिये.


CM नीतीश को याद दिलाई जा रही उनकी विचारधारा
पूर्व मंत्री और राजद नेता शिवचंद्र राम का कहना है कि समाजवादी धारा को मानने वाले नीतीश कुमार (Nitish kumar) को एनडीए से बाहर आकर लोहिया, जेपी और कर्पूरी के सपनों को पूरा करना चाहिये. अगर वह भाजपा के साथ रहते हैं, तो उनका अपमान होता रहेगा. पूर्व एमएलसी और हम के प्रवक्ता उपेंद्र प्रसाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) को सिद्धांतो वाला राजनेता बताते हैं. कहते हैं कि उन्हें इन स्थितियों में एनडीए में घुटन महसूस हो रही होगी, वो ऐसे नेता है, जो सिद्धांतों से समझौता नहीं करते हैं. हमे विश्वास है कि आज नहीं तो कल. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) भाजपा से अपनी राह अलग करेंगे.

हालांकि कांग्रेस नेता नीतीश कुमार (Nitish kumar) पर फोकस नहीं कर रहे हैं. उनके निशाने पर डिप्टी सीएम सुशील मोदी है. वो कह रहे हैं कि जबसे नीतीश कुमार (Nitish kumar) भाजपा के साथ मिल कर सत्ता में आये हैं, तब से प्रदेश के हालात खराब होते जा रहे हैं. कांग्रेस नेता राजेश राठौर का कहना है कि नीतीश कुमार (Nitish kumar) से ज्यादा उम्मीद नहीं की जानी चाहिये. वहीं, कांग्रेस एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा को भी लगता है कि नीतीश कुमार (Nitish kumar) एनडीए का दामन नहीं छोड़ेंगे. हालांकि कई मौकों पर प्रेमचंद मिश्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) को एनडीए से बाहर आने का न्योता देते रहे हैं.

जेडीयू कह रही बीजेपी से गठबंधन अटूट है
इधर, जदयू और भाजपा के नेताओं का कहना है कि अगर विपक्ष किसी तरह की आस लगाये है, तो ये ख्याली है. इसका कोई आधार नहीं हैं. जदयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री जय कुमार सिंह का कहना है कि दोनों दलों के बीच में किसी तरह की समस्या नहीं है. केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार अच्छी चल रही है. केंद्र में नरेंद्र मोदी एनडीए के नेता हैं, तो बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) गठबंधन का चेहरा है. ये बात भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी कहता रहा है. वहीं, जदयू महासचिव और बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा का कहना है कि 2019 की तरह 2020 में भी एनडीए एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा और बिहार में ऐसा नतीजा आयेगा, जिसके बारे में किसी को विश्वास नहीं होगा.


भाजपा के नेता भी जदयू के साथ अपने गठबंधन को अटूट बता रहे हैं और कह रहे हैं कि बिहार में नीतीश कुमार (Nitish kumar) हमारे नेता हैं. विपक्ष को सपने देखने की आदत पड़ गयी है, जिस पर किसी की रोक नहीं है. विपक्ष जितना सोच रहा है, वो केवल कोपल कल्पना है. अलबत्ता बिहार में विपक्ष का अब वजूद नहीं रह गया है. राजनीति के जानकार एनके चौधरी का कहना है कि नीतीश कुमार (Nitish kumar) बिहार में बहुत सशक्त फैक्टर बन कर उभरे हैं. वो जिस ओर जायेंगे, उसका पलड़ा भारी होगा. हालांकि जो परिस्थितयां हैं, उनमें वह भाजपा का साथ छोड़ने का जोखिम नहीं उठायेंगे.