अब दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों का इलाज आसान होगा क्योंकि धमनियों को ठीक करने वाला प्रोटीन बन गया है। 
दिल की बीमारी अब भी दुनिया की जानलेवा बीमारियों में सबसे आगे है। संतुलित खानपान और व्यायाम दिल की बीमारियों को दूर रखने में मदद तो करते हैं, मगर कुछ मामलों में विशेषज्ञ अब भी दिल की बीमारी के कारगर इलाज की तलाश में लगे हुए हैं। एक नये अध्ययन के अनुसार दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों को एक प्रोटीन की सहायता से फिर से जवान बनाया जा सकता है।
अपने प्रयोग के दौरान विशेषज्ञों ने 60 से 79 साल की उम्र के 10 वॉलंटियर को प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट कोएंजाइम  क्यू10 का रिफाइंड वर्जन मिटो क्यू दिया। वहीं अन्य 10 को प्लेसिबो दिया गया। 6 हफ्तों के बाद शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग में शामिल वॉलंटियर की धमनियों की सेहत और आकार का आकलन किया। इसके बाद उन्होंने दोनों समूहों को दिए जाने वाले सप्लिमेंट की अदला-बदली कर दी।
इस प्रकार धमनियों की उम्र में 15 से 20 साल का फर्क आया: विशेषज्ञों ने देखा कि मिटो क्यू  सप्लिमेंट लेने वाले वॉलंटियर की धमनियों की उम्र में 15 से 20 साल तक का अंतर देखने को मिला। एक प्रमुख शोधकर्ता ने कहा कि अगर धमनियों की स्थिति में इस स्तर का सुधार होता है, तो इससे हृदय रोगों की आशंका को 13 फीसदी तक कम किया जा सकता है। 
पर्याप्त मात्रा में सब्जी और फल से कम होता खतरा 
पर्याप्त मात्रा में सब्जी और फल नहीं खाने से दुनिया भर में लाखों लोग हर वर्ष हृदय और आघात संबंधी बीमारियों की वजह से मौत का शिकार हो जाते हैं। एक अध्ययन से यह जानकारी मिली है। हृदय और आघात संबंधी बीमारियों की वजह से मौत के अध्ययन में यह पता चला है कि हृदय संबंधी बीमारी से होने वाले मौत के मामले में सात में से एक की मौत पर्याप्त मात्रा में फल नहीं खाने और 12 में से एक व्यक्ति की मौत पर्याप्त मात्रा में सब्जी नहीं खाने से होती है।            
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि पर्याप्त मात्रा में फल नहीं खाने की वजह से 2010 में 18 लाख लोगों की मौत हो गई जबकि 10 लाख लोगों की मौत पर्याप्त मात्रा में सब्जी नहीं खाने से हुई।            
अनुसंधानकर्ता का मानना है कि फल और सब्जियां हमारे आहार के लिए जरूरी घटक हैं जो उन बीमारियों से होने वाली मौत को रोकने में प्रभावी साबित हो सकती हैं जिनका इलाज संभव है।