नई दिल्ली । दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के आलाकमान ने बड़ा गेम खेला है। पहली उसने 3 बड़े नेताओं को दिल्ली में पार्टी की बागडोर संभालने का जिम्मेदारी सौंपी है। सवाल यह है कि यह प्रभावी नेता दिल्ली में भाजपा का २० साल का वनवास खत्म कर पाएंगे। दिल्ली में प्रदेश बीजेपी की टीम कमजोर है और उसमें अपने बूते ‘चमत्कार’ करने की क्षमता नहीं है, ऐसे में नए नेताओं को खासी मेहनत करनी होगी। वैसे भाजपा को इस बार दिल्ली में ‘संभावनाएं’ नजर आ रही हैं, अगर कुछ ‘अवरोधों’ से आलाकमान की यह तिकड़ी पार पा ले। भाजपा आलाकमान ने अपने जमीन से जुड़े नेता प्रकाश जावड़ेकर को दिल्ली का प्रभारी नियुक्त किया है। इसके अलावा दो सह-प्रभारी के रूप में हरदीप पुरी व नित्यानंद राय भी नियुक्त किए हैं। 
    सूत्रों के अनुसार यह पहली बार हुआ है कि जब दिल्ली में प्रभारी के साथ दो सह-प्रभारी भी नियुक्त किए हैं। वरना हमेशा प्रभारी ही नियुक्त करने की परंपरा है। इन तीनों नेताओं की बात करें तो जावड़ेकर को पार्टी का बड़ा रणनीतिकार माना जाता है, जबकि हरदीप पुरी को दिल्ली के पंजाबी वोटरों को साधने व बिहार के नेता राय को दिल्ली के पूर्वांचल वोटरों को रिझाने के लिए नियुक्त किया गया है। वैसे तो प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी खुद भी पूर्वांचल से आए हैं। इसलिए माना जाता है कि इन दोनों की ‘ट्यूनिंग’ दिल्ली के करीब ४० प्रतिशत मतदाताओं को साध पाएगी। भाजपा आलाकमान बड़े नेताओं को तो दिल्ली में उतार दिया है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली बीजेपी की कमजोर टीम को मजबूत करना होगा। दिल्ली की कार्यकारिणी में अधिकतर नेताओं की पूरी दिल्ली में स्वीकार्यर्ता नहीं है, जैसे पहले कभी मदनलाल खुराना, विजय कुमार मल्होत्रा, ओमप्रकाश कोहली, जगदीश मुखी, पवन शर्मा आदि नेताओं की हुआ करती थी। 
    प्रदेश के नेता भी मान रहे हैं कि दिल्ली के टीम के ये नेता प्रफेशनल तो माने जा सकते हैं, लेकिन उन्हें जननेता माना नहीं जा सकता। कार्यकारिणी के इन नेताओं ने न तो दिल्ली में बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया है और न ही वोटरों को साधने में अपनी कलाकारी दिखाई है। ऐसे में देखना यह होगा कि ये आलाकमान के ये नेता प्रदेश टीम में बदलाव करते हैं या उसे मजबूत करने के लिए ‘ठोस कदम’ उठाते हैं।