नई दिल्ली । दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित के निधन के बाद पार्टी ने नए प्रेदश अध्यक्ष के लिए माथा-पच्ची शुरू कर दी है। दिल्ली कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी आलाकमान के लिए परेशानी की वजह बनी हुई है। आलाकमान दिल्ली में अगले दिनों में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में सावधानी बरत रहा है। इस बीच खबर है कि आला कमान शत्रुध्न सिन्हा या नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी की राज्य इकाई की जिम्मेदारी सौंप सकती है। इसमें बिहारी बाबू सिन्हा के नाम को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि दिल्ली में बिहारियों की काफी संख्या है। शत्रुघ्न सिन्हा और नवजोत सिंह सिद्धू, दोनों ही  भाजपा से कांग्रेस में गए हैं। सिद्धू जहां पंजाब कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद खाली है, तो शत्रुघ्न के पास पटना साहिब से चुनाव हारने के बाद कोई जिम्मेदारी नहीं है। इस पर प्रतिक्रिया करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मैं इस पद का उच्छुक नहीं हूं, लेकिन अलग पार्टी मुझे यह जिम्मेदारी सौंपती है, तो सहर्ष उठाऊंगा। 
अगर कांग्रेस उन्हें दिल्ली की कमान को सौंपती है तो शत्रुघ्न मनोज तिवारी के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं, क्योंकि दोनों बिहार से हैं और दोनो ही बिहारियों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। दिल्ली में बिहार और पूर्वाचंल के लोगों की तादाद अच्छी-खासी है। यही वजह है पार्टी नेतृत्व उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर रहा है। पार्टी की राज्य इकाई किसे सौंपी जाए, इस पर पार्टी नेताओं में दो गुट हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि दिल्ली के ही वरिष्ठ नेताओं में से किसी एक को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए, तो दूसरी ओर कुछ नेताओं कहना है कि किसी बाहरी को यह जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए, ताकि गुटबाजी पर अंकुश लगाया जा सके। आलाकमान भी किसी बाहरी को ही यह जिम्मेदारी देने पर जोर दे रहा है, क्योंकि दिल्ली में उसका यह प्रयोग पहले सफल हो चुका है। सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभालते ही दिल्ली में यह प्रयोग किया था। 1998 में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने शीला दीक्षित को दिल्ली की कमान सौंपी थी। शीला दीक्षित को कमान सौंपते ही दिल्ली में भाजपा के एकछत्र राज को समाप्त करने में कांग्रेस कामयाब हो पाई थी। कांग्रेस ने न सिर्फ दिल्ली में भाजपा की जड़ें कमजोर कीं बल्कि 15 वर्षों तक शीला के नेतृत्व में सत्ता में भी रही। पार्टी एक बार फिर इसी प्रयोग पर अमल करना चाहती है।