(03 अगस्त : हरियाली तीज पर विशेष) 


हिन्दु पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार हिन्दु धर्म में अनेक पावन त्यौहारों का विशेष महत्व होता है, यह त्यौहार संपूर्ण भारत वर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाएं जाते है,  क्योंकि त्यौहारों से हमें विशिष्ठ ज्ञान और आनंद की अनुभूति प्राप्त होती है, हिन्दु धर्म में त्यौहारें को ऊँचा स्थान दिया जाता है, यह त्यौहार प्रेम, करूणा, दया, क्षमा, और संस्कृति से सम्बन्धित होते है, वास्तव में त्यौहार समाज में फैली बुराईयों को दूर करने में काफी सफल रहे है, हिन्दु धर्म में धर्म का क्षेत्र विस्तृत और व्यापक है, उन्हीं त्यौहारों मे से एक त्यौहार हरियाली तीज है, जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनायी जाती है, इसलिए इसे हरियाली तीज और श्रावण शुक्ला तीज कहा जाता है, यह तीज बडी पवित्र मानी जाती है, वैसे तो श्रावण मास में समस्त दिन बडे शुभ माने जाते है, लेकिन हरियाली तीज का व्रत नियम पूर्वक करने से समस्त पापों का नाश होता है, और अभीष्ठ फल की प्राप्ति होती है, हिन्दु धर्म में त्यौहारों को ही विशेष रूप दिया जाता है, इस प्रकार कलियुग में धर्म का मार्ग ही ज्ञान अर्जन करने का सही तरीका है, जिसे विरले ही समझ लेना हमारी संस्कृति है।      
श्रावण शुक्ला तीज का विधान :- 
श्रावण मास सर्वश्रेष्ठ मास होता है, क्योंकि यह मास भगवान शंकर का अति प्रिय मास है, इसलिए इस मास में धर्मिक आयोजन, कर्मकाण्ड, जाप, अनुष्ठान एवं शिव रूद्राभिषेक आदि अनेक कार्यप्रम हर्षोल्लास के साथ मनाएं जाते है, श्रावण शुक्ला तीज का त्यौहार श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को उत्तरी भारत के सब नगरों में विशेष रूप से मनाया जाता है, घर-घर झूले पडते है, नारियों के समूह गा-गाकर झूला-झूलती है, सावन में सुन्दर-सुन्दर पकवान गुंजिया घेवर फ़ैनी आदि बेटियों को सिंझारा भेजा जाता है, बायना छूकर सासू को भेजा या दिया जाता है, इस तीज पर मेंहदी लगाने का विशेष महत्व है, स्त्रियां हाथों पर मेंहदी से भिन्न-भिन्न प्रकार के बेल बूटे बनाती है, तीजों पर मेंहदी रचाने की कलात्मक विधियां परम्परा से स्त्रियां समाज में चली आ रही है, स्त्रियां पैरों में आलता भी लगाती है, जो सुहाग का चिन्ह माना जाता है। इस तीज पर निम्न बातों को त्यागने का विधान है, पति से छलकपट त्यागना, झूठ बोलना त्यागना, परनिन्दा त्यागना कहते हैं, कि इस दिन गौरा विरहाग्नि में तपकर शिव से मिली थीं, इस दिन राजस्थान में राजपूत लाल रंग के कपडे पहनते है, माता पार्वती की सवारी निकाली जाती है, राजा सूरजमल के शासन काल में इस दिन कुछ पठान कुछ स्त्रियों को अपहरण करके ले गये थे, जिन्हे राजा सूरजमल ने छुडवाकर अपना बलिदान दिया था, उसी दिन से यहां मल्लयुद्ध का रिवाज भी शुरू हो गया था। 
तीज पर अपने पति की दीर्घायु होने की कामना :- 
शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली तीज का त्यौहार पूरे हर्षोल्लासपूर्वक मनाया जाता है, मंदिर में पूजा कर महिलाएं अपने पति के दीर्घायु होने की कामना करती है, शाम को विभिन्न मंदिरों में गीत संगीत के कार्यप्रम किए जाते है, तथा समूह में मल्हर, कजरी गीत गाकर व झूला झूलकर महिलाएं त्यौहार का आनंद उठाती है, पति की दीर्घायु के आशीर्वाद मांगने के लिए मंदिरों में महिलाओं की काफी भीड लगी रहती है, माँ पार्वती व भगवान शिव की पूजा व कथा सुनकर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु होने का आशीर्वाद मांगती है, इस प्रकार पूजा अर्चना के बाद बडी संख्या में उपस्थित महिलाएं सावन के गीतो को गाकर व झूम कर तीज का त्यौहार मनाती है, परंपरा के अनुसार तीज सभी पर्व की शुरूआत की प्रतीक मानी जाती है, आ गई तीज बिखेर गई बीज, आ गई होली भरे ले गई झोली कहावत के आधार पर तीज पर्व के बाद त्यौहारों का शीर्घ आगमन होता है, और यह सिलसिला होली तक चलता है।