भोपाल। प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद गुजरात को तय अनुबंध के तहत ही नर्मदा पानी देना शुरू कर दिया है। जिसको लेकर गुजरात ने नाराजगी जाहिर की है और मप्र पर गंदी राजनीति करने के आरोप लगाए हैं। गुजरात सरकार के आरोपों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि परेशान नहीं होना चाहिए, एग्रीमेंट के अनुसार ही नर्मदा का पानी दिया जाएगा। जो एग्रीमेंट में है उससे अधिक भी नहीं देंगे। इससे पहले मप्र में भाजपा सरकार होने पर गुजरात दबाव के चलते एग्रीमेंट से ज्यादा पानी लेता रहा है। 

गुजरात को नर्मदा के पानी की आपूर्ति रोके जाने के बाद मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कहा कि कांग्रेस को पानी के नाम पर कोई गंदी राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह बचकाना, दुर्भाग्यपूर्ण, शर्मनाक, राजनीति प्रेरित और बदनीयतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने पहले नर्मदा परियोजना को रोकने का भरपूर प्रयास किया था और अब इसी को लेकर मप्र की कांग्रेस सरकार गंदी राजनीति खेलने का प्रयास कर रही है। 

 

40 साल से कोई विवाद नहीं था 

रूपानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित नर्मदा नियंत्रण प्राधिकार की ओर से निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप परियोजना से जुड़े चारों राज्यों गुजरात, मप्र, राजस्थान और महाराष्ट्र के पानी के हिस्से में वर्ष 2024 तक कोई बदलाव संभव नहीं है। किसी तरह का मुद्दा होने पर उस पर बातचीत का प्रावधान है। ऐसे में मप्र सरकार को हमें धमकी देने का प्रयास नहीं करना चाहिए। गुजरात सरकार ने आज तक ऐसा कुछ भी नहीं किया जो मप्र की जनता के हितों के विरूद्ध हो। मप्र को उसके हिस्से की 57 प्रतिशत पनबिजली भी मिल रही है। पुनर्वास का काम भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप हुआ है।

 

गुजरात के दबाव में नहीं आएगा मप्र 

मप्र के नर्मदा घाटी विकास विभाग के मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने कहा है कि पूर्व में वहां की भाजपा सरकारों ने गुजरात के दबाव के तहत उसे उसके लिए आवंटित से अधिक हिस्से में पानी की आपूर्ति की थी पर कांग्रेस की सरकार आने के बाद अब ऐसा नही होने दिया जायेगा। राज्य सरकार मप्र की जनता के हित का ध्यान रख कर ही कोई कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि गुजरात पर मप्र के हिस्से का बिजली का भुगतान भी बकाया है।