पटना: बिहार के 12 जिलों में 79 प्रखंडों की 26 लाख से अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में है. सबसे खराब स्थिति मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर और पूर्वी चंपारण की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन इलाकों का हवाई सर्वे किया और उसके बाद विधानसभा में वक्तव्य दिया जिसमें उन्होंने फिर कहा कि बिहार के खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का है. सरकार हर पीड़ित परिवार को छह हजार की मदद करेगी और ये मदद अब सीधे लाभुकों के खाते में जाएगी. लाभुकों को इसके लिए बैंक का चक्कर नही लगाना पड़ेगा. ये राशि खातों में ट्रांसफर की जाएगी. 

विधानसभा में वक्तव्य देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पीड़ितों की मदद के लिए जो भी जरूरी कदम होंगे वो सब सरकार की ओर से उठाए जाएंगे. हर जिले में आपदा नियंत्रण कक्ष बनाया गया है. राज्य स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष बनाया गया है, इसके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव ऑफिस, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव के कार्यालय से मॉनिटरिंग की जा रही है. मुख्यमंत्री में कहा कि बाढ़ से कई जगहों की ठीक नहीं है, ये सब नेपाल में औसत से पांच से छह गुना ज्यादा बारिश होने की वजह से हुआ है. सबसे ज्यादा पानी कमला बलान में आया है, जिसमें 1987 के बाद सबसे ज्यादा पानी रिकॉर्ड किया गया. 

लालबकेया, बागमती और अधवारा समूह की नदियों में भी काफी पानी आया. बागमती में. 74 मीटर का रिकॉर्ड दर्ज किया गया जो 2017 में आई बाढ़ से 40 सेंटीमीटर ज्यादा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं. लोगों को राहत पहुंचाने के लिए एक हजार से ज्यादा कर्मचारियों को लगाया गया है. अब तक 1.05 लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है. पशुओं के चारे के लिए भी विशेष इंतजाम करने को कहा गया है. 


300 से ज्यादा सड़कें बाढ़ की वजह से प्रभावित हुई हैं जिन्हें पानी उतरने के साथ चलने लायक बनाने का निर्देश दिया गया है. इसके लिए दो दिन से पथ निर्माण विभाग के प्रधाम सचिव अमृत लाल मीणा और ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव दौरा कर रहे हैं. पूरी जानकारी जुटाई जा रही है. एनएच 31 पर बेली ब्रिज बना कर यातायात को बहाल किया जाएगा. 
 
मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा कि फसल की क्षति पर किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी दी जाएगी, इसके लिए भी पहल करने को कहा गया है. विपक्षी सदस्यों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सब लोग मिलकर आपदा की इस घड़ी में पीड़ितों की मदद करें. यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए. अभी जुलाई में बाढ़ आई है, ये 2017 की तरह फ्लैश फ्लड है. आगे भी बाढ़ आ सकती है. अगस्त महीने में पता चलेगा, कई जिलों में सूखे की स्थिति है. उससे निपटने के लिए सरकार तैयार है. सब तरह के इंतजाम किए जा रहे हैं.
 
मुख्यमंत्री के वक्तव्य पर विपक्ष ने निशाना साधा और कहा कि योजना तो अच्छी है, लेकिन जमीन पर काम नहीं हो रहा है. सरकार को जमीन पर मदद मुहैया कराना चाहिए, ताकि पीड़ितों को राहत मिल सके. राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि कई इलाकों में हालात खराब हैं. माले विधायक महबूब आलम ने कहा कि सरकार की ओर से सिर्फ भाषणों में राहत दी जा रही है, जमीन पर काम नहीं हो रहा है, जनता त्राहिमाम कर रही है.