इन्दौर । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति के आदेशानुसार मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधिपति श्री एस.सी.शर्मा के निर्देशन में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में 13 जुलाई,2019 शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।
प्रिंसिपल रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय ‍विधिक सेवा समिति इंदौर श्री अनिल वर्मा ने बताया कि 13 जुलाई,2019 को आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में शमनीय आपराधिक प्रकरण, परक्राम्य अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरण, बैंक रिकवारी संबंधी मामले, एमएसीटी प्रकरण (मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति द्वारा प्रकरण), वैवाहिक प्रकरण, श्रम विवाद प्रकरण, भूमि आधिग्रहण के प्रकरण, विद्युत एवं जल कर/बिल संबंधी प्रकरण (अशमनीय मामलों को छोड़कर), सेवा मामले जो सेवा निवृत्त संबंधी लाभों से संबंधित है, राजस्व प्रकरण, दीवानी मामले तथा अन्य समस्त प्रकार के राजीनामा योग्य प्रकरणों का निराकरण आपसी समझौते के आधार पर किया जायेगा।
नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम के अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण 27 जून,2019 को नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी, न्यू इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी, यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी, ओरियंटल  इंश्योरेंस कम्पनी एवं 28 जून,2019 को 12 इंश्योरेंश कम्पनी के अधिकारियों के साथ प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के कक्ष में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के संबंध में चर्चा की गई।
नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम के अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण लोक अदालत पूर्व क्लेमेन्ट्स (दावेदार पक्षकारों के) अभिभाषकों एवं समस्त बीमा कम्पनी के अभिभाषकों की बैठक 01 जुलाई,2019 को सायं 4 बजे कान्फ्रेंस हॉल उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में आयोजित की जायेगी ।
समस्त पक्षकरों एवं अधिवक्तागण से अपील की गई है कि उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकृत कराने हेतु मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में प्रिंसिपल रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार, संबंधित सेक्शन एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति इंदौर से संपर्क कर सकते है एवं अपने प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत में रखने हेतु आवेदन/सूचना दे सकते है। लोक अदालत के माध्यम से प्रकरण का निराकरण होने पर शासन द्वारा अदा की गई कोर्ट फीस वापसी का भी प्रावधान है।