पृथ्वी पर अत्याचार का नाष करने ईश्वर ने समय-समय पर किसी ना किसी रूप में जन्म लिया और अत्याचार को खत्म किया। पौराणिक ग्रंथों में ऐसी कई कहानियों का उल्लेख है। भगवान ने स्वयं कहा है कि जब जब अत्याचार बढेगा। तो क्रांति होगी। यह क्रांति बुराई का अंत करने के लिए होगी। दरअसल, यहां क्रांति का अर्थ मानव कल्याण के लिए है। जो पूरी तरह से सकारात्मक है। बुराई का अंत करने के लिए की गई क्रांति, कई जन्म-जन्मांतर के दुःखों का अंत कर देती है। ये तो बात हुई पौराणिक युग की। आधुनिक युग में भी कई क्रांतियां होती हैं। उदाहरण के तौर पर भारत में सन् 1857 की क्रांति मानवीय हित के लिए की गई, लेकिन कुछ कारणों के चलते असफल रही। इसके बाद लगातार क्रांतियां हुईं और देश को आजादी मिली। इस प्रकार कहना गलत नहीं होगा कि क्रांति यदि सकारात्मक संदर्भ में की जाए तो कोई बुराई नहीं है। निजी जीवन में भी क्रांति होनी चाहिए। यह क्रांति स्वयं में स्वयं से होती है। आप स्वयं से सवाल करें कि कल क्या था और क्या बनना चाहता था, क्या बना और आगे क्या बन सकता हूं। नया करने के लिए ऐसी ही सकारात्मक क्रांति की आवश्यकता है। इस प्रकार प्रत्येक जीवन में सकारात्मक क्रांति का बुनियादी महत्व है और इसमें कोई दिक्कत भी नहीं है।