धर्म कहता है जीवन ऐसे जियो ताकि जीव को अमरत्व प्राप्त हो जाए। इसलिए कहते हैं कि जीवन में यदि कोई सिद्धांतवादी हो जाता है तो उससे मार्ग प्रशस्त करने को भी कहा जाता है। ऐसा सबसे बड़ा उदाहरण हमारे सम्मुख राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का है। जिनके जन्म दिन 2 अक्टूबर को दुनिया भर में अहिंसा दिवस के रुप में मनाया जाता है। दरअसल शान्ति और अहिंसा का पैग़ाम देने वाले महात्मा गाँधी को ख़ासतौर से इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने पवित्र ध्येय के लिए साधनों की पवित्रता पर भी जोर दिया। यही वजह है कि उन्होंने आजादी की लड़ाई तो लड़ी लेकिन बिना हिंसा और बिना हथियार उठाए। दो अक्तूबर महात्मा गाँधी के जन्म दिन की याद में अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाकर हम अंहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा करते हैं। ग़ौरतलब है कि महात्मा गाँधी ने ही हिंसा का सहारा लेने के बदले शान्तिपूर्ण तरीक़े से विरोध जताने को तरजीह दी थी जिसे अहिंसा का नाम दिया गया। यह भी कहा जाता है कि भारत ने महात्मा गाँधी के अहिंसक आन्दोलन की बदौलत ही आज़ादी हासिल की। महात्मा गाँधी ने जो शान्ति और अहिंसा का पैग़ाम दिया उसने दुनिया भर में अहिंसक आन्दोलनों के ज़रिए सामाजिक और राजनैतिक बदलाव की प्रेरणा दी। अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के मौक़े पर महात्मा गाँधी के जीवन मूल्यों और सिद्धान्तों पर ख़ास रौशनी डालने वाले तो यही कहते हैं कि यदि आपको जीवनउपरांत भी अमरत्व प्राप्त करना है तो आज से ही जीवन में शांति और अहिंसा को अपना लें।