जबलपुर। नया शैक्षणिक सत्र आज से शुरू हो रहा है। स्कूलों में फिर से नन्हे-मुन्ने बच्चों की rकिलकारियां गूंजेंगी। विगत चार-पांच वर्षों से शैक्षणिक वैâलेण्डर में राज्य सरकार ने परिवर्तन किया है। पहले स्कूल १ जुलाई को खुला करती थीं और पूरे मई और जून के महीने में दो माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश हुआ करता था। अब अप्रैल में १५ दिन तक स्कूल लगती है और १६ जून से शैक्षणिक सत्र प्रारंभ हो जाता है। लेकिन इस बार गर्मी को देखते हुये राज्य सरकार ने २४ जून से नया शिक्षण सत्र प्रारंभ करने का पैâसला किया है लिहाजा आज से राज्य सरकार की सभी सरकारी और निजी स्कूलें खुल जाएंगीं। ‘स्कूल चलें हम’ अभियान के तहत सरकारी शालाओं में प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा। शालाओं में जन प्रतिनिधि उपस्थित होकर बच्चों का स्वागत करेंगे। आज ही गणवेश और पाठ्यपुस्तक वितरण किया जायेगा। 
    बहरहाल, दो माह के अवकाश के बाद नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने आ गया, पर स्कूलों की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ। अवकाश के दौरान शालाओं की रंगाई-पुताई और मरम्मत के काम की अनदेखी की गई। कई शालाओं के भवन जर्जर हैं तो कई के छप्पर जर्जर हैं, जो बारिश में परेशानी का सबब बनेंगे। नगर निगम की स्कूलों की हालत तो और भी बदतर है। अवकाश के सीजन में स्कूलों में देखरेख नहीं होने से कचरे का ढेर लग गया है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर तबादले की तलवार लटक रही है। शिक्षक अपनी पदस्थापना मनचाहे स्थान पर कराने के लिये लगे हैं। उधर दूसरी ओर कई निजी स्कूलों में आज से और कई नामचीन शालाओं में १ जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होगा। निजी स्कूलें, हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी परीक्षाओं में भले ही जलवा न दिखा पाई हों, लेकिन उनकी प्रवेश और शिक्षा के व्यवसायीकरण की दुकान चमक-दमक के साथ शुरू हो गई है। 
    दो माह के अवकाश के बाद बच्चे आज से स्कूल जाएंगे। आज सुबह से ही शालाओं में नन्हे-मुन्ने बच्चों की किलकारियां गूंजेंगी। जो बच्चे पहली बार पाठशाला जाएंगे, वे अभी अविभावकों को परेशान करेंगे। मंहगाई का असर अध्ययन-अध्यापन पर भी पड़ेगा। कापी, किताबें पहले से ही मंहगी हो गई थीं। अब स्कूली ड्रेस, रिक्शा, ऑटो, बस वाले भी बच्चों को स्कूल लेने-ले जाने वाले भी भाड़े के लिये तैयार बैठे हैं। हाल ही में डीजल, पेट्रोल के दामों में हुई वृद्धि से किराये भाड़े में वृद्धि की जा रही है। नये शिक्षण-सत्र् की पूर्व संध्या पर अविभावक, जूते चप्पल, बस्ते, टाई, कापी किताब खरीदने में जुटे रहे। लेकिन सरकारी स्कूलों में नये शिक्षण-सत्र् की कोई तैयारी नहीं थी। शासकीय प्राथमिक शालाओं से लेकर भवनों की रंगाई पुताई, स्कूलों के गेट के सामने कचरे का ढेर लगा हुआ था। शालाओं के खप्पर फूटे हुये थे। आने वाले बारिश के दिनों में छतें टपकेंगी। कई स्कूलों के भवन भी जर्जर हैं। लिहाजा शासकीय स्कूलों में नये शिक्षण सत्र के पहले दिन से पढ़ाई लिखाई प्रारंभ हो पाएगी, इसकी उम्मीद कम ही है। निजी शालाओं ने जरूर नये शिक्षण सत्र की जोरदार तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। हाई प्रोफाईल स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और शाला भवनों के रंग-रोगन का काम भी पूरा हो चुका है। लेकिन इन स्कूलों ने आम अभिभावकों की कमर तोड़कर रख दी है। लाख प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद भी स्कूली ड्रेस और कापी किताब का धंधा स्कूलों के माध्यम से ही चल रहा है। इस पर कोई रोक-टोक नहीं है। डीएन जैन बोर्डिंग मार्वेâट, देशबंधु कॉम्प्लेक्स और सदर व गोरखपुर स्थित कापी किताब की चार दुकानें ऐसी हैं, जहां हाई प्रोफाईल स्कूलों की किताबें मिलती हैं। अविभावक चाहकर भी किसी अन्य पुस्तक विक्रेता के यहां से पुस्तकें नहीं खरीद सकते। क्योंकि कुछ खास स्कूलों में चलने वाली पुस्तकें इन्हीं दुकानों पर उपलब्ध हैं और इन दुकानों की सेटिंग संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों व प्रबंधन से है।