एक समय की बात है एक शहर के बुद्धिमान व्यक्ति के पास एक शख्स आया और उसने उनसे जानना चाहा कि उनके पास लोग तो बहुत हैं जो उसके कहने पर काम करते हैं, लेकिन उसके पास कोई भी विश्वासपात्र व्यक्ति नहीं है। उसने कहा कि 'मेरे कर्मचारी मुझसे बात बात पर झूठ बोलते हैं। यहां तक कि मेरे परिवार में मेरे बच्चे और पत्नी कि स्वार्थियों जैसा व्यवहार करते हैं। मानों यह दुनिया ही स्वार्थी है। कोई मुझे सही नहीं नजर आता है।' यह सुनकर बुद्धिमान व्यक्ति थोड़ा मुस्कराया और उसे असंतुष्ट को एक कहानी सुनाते हुए बोला, 'किसी जमाने में एक गॉंव था। वहां एक बड़े से कमरे में 1000 के करीब शीशे लगे थे। एक छोटी बच्ची उस हॉल में खेलने जाया करती थी। वहां उसे खेलना बहुत अच्छा लगता था। दरअसल उसे लगता था कि मानो हजारों बच्चों के साथ वह खेल रही है। वह तालियाँ बजाती, तो हजार बच्चे उसके साथ में तालियाँ बजा रहे होते। उसे ऐसा करते हुए लगता कि यह दुनिया का सबसे बेहतरीन स्थान है। एक बार उस हाल के भीतर एक गुस्सैल और उदास व्यक्ति चला गया। उसे लगा कि वह हजार गुस्सैल लोगों से घिरा हुआ है। वे सब उसे घूर रहे हैं। वह डर गया, उसने उन्हें मारने के लिए अपना हाथ ऊपर उठाया तो उसी की तरह हजार हाथ खड़े हो गए। अब उसे लगा कि यह तो दुनिया की सबसे ख़राब और बेकार जगह है, यह समझ वह तुरंत वहां से बाहर निकल गया।' यह कहानी सुन उस शख्स को अपनी गलती समझ आ गई और तभी बुद्धिमान व्यक्ति ने उससे पूछा बताओ धोखेबाज कौन नहीं है?