अहमदाबाद | गुजरात सरकार ने राज्य के युवाओं को नशे की लत से बचाने की दिशा में अहम फैसला किया है| राज्य में इलेक्ट्रोनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम द्वारा मंगाई जाती ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और संबंधित कानून में सुधार किया जाएगा| यह जानकारी देते हुए गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जाडेजा ने बताया कि राज्य के युवाओं में ऑनलाइन मंगाई जाती ई सिगरेट का चलन बढ़ा है| जो स्वास्थ्य के काफी हानिकारक है| इसके लिए इलेक्ट्रोनिक्स निकोटिन डिलीवरी सिस्टम (एनडीएस) द्वारा ऑनलाइन मंगाई जाती ई सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया जाएगा| उन्होंने बताया कि भारत के 12 राज्यों समेत दुनिया के 36 देशों में इस प्रकार की ई सिगरेट पर प्रतिबंध है| ई सिगरेट बैटरी चलित एक ऐसा साधन है, जिसमें मौजूद प्रवाही एरोसोल में परिवर्तित करता है, जिसे पीने वाला सांस में खींचता है और बाहर निकाल देता है| ई सिगरेट में जो प्रवाही होता है उसमें निकोटिन, प्रोपिलीन, ग्लायकोल, ग्लीसरीन फ्लेवरिंग्स और अन्य रसायण होते हैं| संशोधन में साबित हुआ है कि ई सिगरेट के एरोसोल में कई हानिकारक तत्व के अलावा डायासिटील नामक रसायण फेफड़ों के रोग के लिए जिम्मेदार है| साथ ही उसमें ऐसे भी तत्त्व हैं, जिससे कैंसर हो सकता है| ई सिगरेट के उत्पादकों का दावा है कि इसमें निकोटिन नहीं होता, परंतु ई सिगरेट में निकोटिन की मौजूदगी पाई गई है| गुजरात में ई सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं होने के कारण वह सरलता से ऑनलाइन उपलब्ध है| फूड एन्ड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन, अमेरिका के नियमों के मुताबिक 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की व्यक्ति ही ई सिगरेट खरीद सकता है| लेकिन भारत में ऑनलाइन या अन्य कोई बिक्री पर रोक नहीं होने की वजह से 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे भी ई सिगरेट खरीद सकते हैं और उसके आदी होकर अपनी बर्बादी को न्यौता देते हैं| इस प्रकार के नशे से राज्य के युवाओं को बचाने के लिए आगामी समय में संबंधित कानून में सुधार किया जाएगा| जाडेजा ने कहा कि राज्य सरकार नशाबंदी के कड़े अमल के लिए कानूनी सुधार कर कानून को सशक्त बनाया है| ऐसे में ड्रग्स, नशेली पदार्थों की बिक्री और संग्रह करने वाले किसी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी| जिस इलाके में नार्कोटिक्स पकड़ा जाएगा, उस क्षेत्र के अधिकारी के खिलाफ भी कड़ी कार्यवाही की जाएगी|