अहमदाबाद | मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि राज्य में सामाजिक समरसता एवं सद्भावना के साथ ही शांतिपूर्ण वातावरण रहे, इसके लिए अनुसूचित जाति-जनजाति, पीड़ित-शोषित तथा दलित वर्गों पर हत्या, बलात्कार सहित गंभीर अत्याचारों के मामले में आरोपियों को पकड़ने, चार्जशीट तैयार करने सहित प्रक्रियाओं पर विशेष फोकस किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे वंचित वर्गों को सामाजिक न्याय मिले और सुरक्षा मिले ऐसी सुदृढ़ व्यवस्था तथा उसका मॉनिटरिंग करने के लिए राज्य सरकार पूर्णतया प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री रूपाणी ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता-आदिजाति विकास विभाग की राज्यस्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। गांधीनगर में आयोजित इस बैठक में उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल, विधानसभा में विपक्ष के नेता परेशभाई धानाणी के साथ ही गुजरात सरकार के मंत्री भूपेन्द्रसिंह चूड़ास्मा, गणपतसिंह वसावा, ईश्वरभाई परमार एवं प्रदीपसिंह जाडेजा के साथ ही कई विधायक मौजूद थे। 
रूपाणी ने कहा कि अनुसूचित जातियों, जनजातियों, दलित एवं आदिवासी समाज पर होने वाले अत्याचारों के मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में सिर्फ अत्याचार निवारण ही नहीं बल्कि गरीबतम व्यक्ति को न्याय एवं सरकार पर भरोसा रहे, विश्वास रहे इस प्रकार का वातावरण बनाने के लिए समिति विशेष आयोजन करे यह आवश्यक है। अत्याचारों के मामले में दोषियों को कड़ी सजा मिले और पीड़ितों को सच्चा न्याय-सुरक्षा मिले यह सरकार की प्रतिबद्धता है। उप मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता ने भी विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समरसता विकास का आधार है। राज्य में जिन 32 गांवों और 20 मोहल्लों में लोग लंबे समय से पुलिस सुरक्षा के बीच रहते हैं वहां पर सामाजिक शांति-सौहार्द-सद्भाव स्थापित हो और सभी लोग पुनः मिल जुलकर रहें इसके लिए जिला कलक्टर, एसपी और जनप्रतिनिधि स्थानीय अग्रणियों के साथ मिलकर सामाजिक अभियान चलाएं। बैठक में चर्चा के दौरान कहा गया कि राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजातियों पर होने वाले अत्याचारों के मामले में सहायता के नए मानदंड घोषित किए हैं। इसके अनुसार अनुसूचित जातियों पर अत्याचार के मामले में पिछले एक वर्ष में 16 करोड़ रुपए की सहायता पीड़ितों को चुकाई गई है। अनुसूचित जनजातियों के मामले में 2 करोड़ 84 लाख रुपए की सहायता प्रदान की गई है। राज्य में ऐसे अत्याचार के मामलों के लिए 16 एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट का गठन किया गया है। मामलों की सुनवाई तेज हो, अपराधियों को तत्काल सजा मिले और पीड़ितों को न्याय मिले, यह सरकार ने सुनिश्चित किया है। इसके साथ ही 17 स्पेशल कोर्ट की भी घोषणा की गई है। सामाजिक समरसता-सौहार्द एवं शांति बनी रहे तथा समग्र राज्य का वातावरण विकासमय रहे इसके लिए तहसील एवं जिला स्तर पर नियमित रूप से सभी संबंधित लोगों के साथ बैठकों का आयोजन किया जाना चाहिए। 
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता के अग्र सचिव मनोज अग्रवाल ने बैठक के विभिन्न एजेंडों पर प्रेजेंटेशन दिया एवं सरकार के कामकाज की जानकारी दी। मुख्य सचिव डॉ. जेएन सिंह, पुलिस महानिदेशक शिवानंद झा, राजस्व के अतिरिक्त मुख्य सचिव, आदिजाति, समाज सुरक्षा, समाज कल्याण के वरिष्ठ सचिव एवं अधिकारी इस बैठक में शामिल थे।