भोपाल । राज्य सरकार ने सभी नगरीय निकायों को आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा गया है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी रैबीज वैक्सीनेशन की संख्या बढ़ाई जाए। गाइडलाइन में कहा गया है कि वर्तमान में जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है उससे कभी भी सभी आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण संभव नहीं है। यह भी कहा गया है कि लक्ष्य बढ़ाते हुए एक या दो साल के अंदर नसबंदी व टीकाकरण पूरा किया जाए। शहर में पिछले दो महीने में आवारा कुत्तों द्वारा मासूमों पर आक्रमण करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अवधपुरी इलाके में मासूम की कुत्तों के नोंचने से मौत तक हो चुकी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे की ओर से मप्र मानव अधिकार आयोग द्वारा की गईं अनुसंशाओं के पालन के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग) रूल्स 2001 को प्रभावी रूप से लागू कर पालन प्रतिवेदन मांगा गया है। हालांकि सरकार द्वारा जिन बिंदुओं पर आवारा कुत्तों पर नियंत्रण करने की बात कही गई है, उसके क्रियान्वयन में समय लगेगा।आवारा कुत्तों की पहचान व उनकी गणना वैज्ञानिक तरके से की जाए। नसबंदी और टीकाकरण का लक्ष्य बढ़ाते हुए एक-दो साल में इसे पूरा किया जाए। गंभीर बीमार कुत्तों को रखने के लिए पर्याप्त संख्या में डॉग शेल्टर बनाए जाएं। कुत्तों की संख्या के अनुसार शहरों में कुत्ते पकड़ने वाले वाहन और वाहन चालक स्वीकृत किए जाने चाहिए। आवारा कुत्तों के काटने की सूचना पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो।आवारा कुत्तों को पकड़ने, सर्वे करने व काटने की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के लिए पर्याप्त संख्या में वाहन व दल होना चाहिए। 
    आवारा कुत्तों पर नियंत्रण व आम जनता में जागरूकता लाएं। प्रत्येक मामलों की विस्तृत जांच हो। धारा पांच के तहत समितियों का गठन हो, जिसकी निगरानी में काम हो। धारा 9 में ठीक न हो सकने वाली बीमारी से पीड़ित व घायल कुत्तों के लिए बताई गई प्रक्रिया के हत कार्रवाई हो। खतरनाक आवारा, खूंखार कुत्तों के विरुद्घ कार्रवाई हो। खतरनाक कुत्तों को अलग रखने की व्यवस्था हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि आवारा कुत्तों से बचने के उपाय व काटने के बाद नगर निगम को तत्काल सूचना देने व उपचार के लिए क्या करना है, इसकी जानकारी दी जाए। पशु कल्याण संगठनों के सहयोग से आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण के लिए कार्रवाई की जाए। कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग उचित कार्रवाई करे। सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि रैबीज के इंजेक्शन पर्याप्त संख्या में सभी अस्पतालों में रखे जाएं। साथ ही 24 घंटे इंजेक्शन लगाने का इंतजाम सभी अस्पतालों में हो। लेकिन शहर के हमीदिया और जेपी अस्पताल में ही एंटी रैबीज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। वह भी ओपीडी के समय पर ही इंजेक्शन की सुविधा मिल पाती है। ऐसे में कुत्ता काटने के शिकार लोगों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। बता दें कि शहर में डेढ़ लाख से अधिक आवारा कुत्ते हैं। वर्तमान में निगम द्वारा सूरज नगर में एक नसबंदी केंद्र संचालित किया जा रहा है, जहां रोजाना सिर्फ 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी व वैक्सीनेशन होता है। इस हिसाब से 10 साल में भी कुत्तों पर नियंत्रण संभव नहीं होगा। नए चार सेंटर खोलने में समय लगेगा। संभागायुक्त ने मई में बुलाई समीक्षा बैठक में निर्देश दिए थे कि आवारा कुत्तों का सर्वे किया जाए ताकि पता चल सके कि कितने हिंसक और कितने सामान्य कुत्ते हैं। हिंसक कुत्तों को रखने के लिए अलग व्यवस्था हो। ट्रीटमेंट के बाद ही निर्धारित स्थान पर छोड़ा जाए। इस दिशा में अब तक कुछ नहीं हो पाया। इस बारे में नगरनिगम के अपर आयुक्त मयंक वर्मा का कहना है कि  आवारा कुत्तों की नसबंदी व वैक्सीनेशन के लिए चार सेंटर खोले जाने हैं। जमीन मिलने के बाद इसके टेंडर किए जाएंगे। अधिक कुत्तों को रखने की व्यवस्था भी की जा रही है।