भोपाल । राजधानी के एक शिक्षण संस्थान को जबलपुर की एक छात्रा को उसके दो लाख रुपए लौटाने होंगे, क्योंकि छात्रा ने बीमार होने के कारण एक भी दिन क्लास अटेंड नहीं की। छात्रा ने दो साल का मैनेजमेंट कोर्स करने के लिए राजधानी स्थित एक शैक्षणिक संस्थान में एडमिशन लिया। उसने जुलाई 2011 में शिक्षण शुल्क डेढ़ लाख रुपए और छात्रावास शुल्क 40 हजार रुपए जमा किए। प्रवेश लेने के बाद वह सिर्फ दो दिन छात्रावास में रही। स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण वह कोर्स नहीं कर पाई और छात्रावास भी छोड़ दिया। छात्रा ने संस्थान से फीस वापस मांगी, लेकिन संस्थान ने इंकार कर दिया। इसके बाद छात्रा ने शैक्षणिक संस्थान के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज कराया। फोरम ने सुनवाई करते हुए कहा कि कोई भी शैक्षणिक संस्थान एडवांस में जमा की गई मोटी फीस को अगर विद्यार्थी ने उसका लाभ नहीं लिया है तो लौटाने से इंकार नहीं कर सकता। संस्थान को दो माह के अंदर छात्रा द्वारा जमा की गई फीस 1 लाख 90 हजार रुपए लौटाने होंगे। साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति राशि 5 हजार रुपए और वाद व्यय राशि 3 हजार रुपए भी देने होंगे।
     फैसला जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष आरके भावे, सदस्य सुनील श्रीवास्तव व सदस्य क्षमा चौरे की बेंच ने सुनाया। यह याचिका जबलपुर की छात्रा अर्पिता द्विवेदी ने पुणे की साईं बालाजी एजुकेशन सोसायटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के कार्यकारी डायरेक्टर मनीष आर मूदड़ा और हबीबगंज के मानसरोवर कॉम्प्लेक्स स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (आईआईएमएस) की शाखा प्रबंधक ज्योति शुक्ला के खिलाफ लगाई थी। छात्रा अर्पिता द्विवेदी ने भोपाल स्थित आईआईएमएस संस्थान से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम) के दो वर्षीय कोर्स के लिए सत्र 2011-2013 में प्रवेश लिया। इसके लिए छात्रा ने संस्थान को 1 लाख 90 हजार रुपए जमा किए। दो दिन छात्रावास में रहने के बाद छात्रा को पीलिया हो गया और वह कोर्स नहीं कर पाई। उसने संस्थान से फीस लौटाने को कहा, लेकिन उसे फीस वापस नहीं लौटाई गई। छात्रा ने टेक्निकल एजुकेशन के रीजनल अधिकारी को भी आवेदन दिया। छात्रा ने फोरम में नवंबर 2012 में याचिका लगाई थी। संस्थान ने यह तर्क रखा कि छात्रा के प्रवेश छोड़ने पर सीट खाली रह गई। जिला उपभोक्ता फोरम ने शैक्षिणक संस्थान के इस तर्क को नहीं माना, साथ छात्रा को फीस लौटाने का फैसला सुना दिया।